राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी का भव्य संत समागम एवं राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न
हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
महासमुंद। राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी द्वारा आयोजित संत समागम एवं राष्ट्रीय अधिवेशन शहर के शंकराचार्य भवन में भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन में देशभर के विभिन्न प्रांतों से संत-महात्मा, संगठन के पदाधिकारी और हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल बिरकोनी स्थित चंडी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। संतों एवं अतिथियों ने माता के दरबार में पहुंचकर राष्ट्र कल्याण एवं आयोजन की सफलता की कामना की। इसके पश्चात सभी अतिथि महासमुंद के लिए रवाना हुए।
महासमुंद पहुंचने पर खैरा चौक से शंकराचार्य भवन तक भव्य स्वागत यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, बाजे-गाजे और आतिशबाजी के बीच निकली इस शोभायात्रा में सैकड़ों कार्यकर्ता और श्रद्धालु शामिल हुए। “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय और राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया।
शंकराचार्य भवन में आयोजित मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं भगवान श्रीराम के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। स्कूली छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने सभी का मन मोह लिया। प्रदेश अध्यक्ष रोशन दुबे सहित संगठन के पदाधिकारियों ने संतों एवं अतिथियों का पुष्पमाला एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।
अधिवेशन के दौरान संतों एवं वक्ताओं ने हिंदू धर्म, सनातन संस्कृति और हिंदुत्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। महामंडलेश्वर स्वामी विष्णु गिरी जी ने धर्म रक्षा के लिए शास्त्र और शस्त्र के संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि संतों के विचारों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है।
स्वामी त्रिलोक स्वरूप जी ने “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को भारतीय संस्कृति की पहचान बताते हुए कहा कि हिंदू समाज ने सदैव मानवता और धर्म की रक्षा का कार्य किया है। वहीं जगतगुरु कल्कि महाराज ने समाज में एकता, समरसता और भाईचारे का संदेश देते हुए जात-पात जैसी कुरीतियों को त्यागने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र देवेद्दी ने संगठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अनुशासन, सेवा और समर्पण की भावना अपनाने का आग्रह किया तथा गौ, गंगा और गायत्री के संरक्षण व सेवा को प्राथमिकता देने की बात कही।
