छोटी जमीन, बड़ी सोच: किसान प्रमोद ने उद्यानिकी खेती से लिखी सफलता की कहानी

महासमुंद। जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम करमापटपर (भदरसी) के किसान प्रमोद चंद्राकर ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, यदि सोच नई हो और मेहनत सच्ची हो। महज 0.41 हेक्टेयर भूमि के स्वामी श्री चंद्राकर आज अपने क्षेत्र में प्रगतिशील किसान के रूप में पहचान बना चुके हैं।
पहले वे पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिसमें लागत अधिक और मुनाफा सीमित था। लेकिन समय के साथ उन्होंने बदलाव का साहसिक निर्णय लेते हुए उद्यानिकी खेती की ओर रुख किया। यही निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिसमें ड्रिप सिंचाई प्रणाली प्रमुख रही। इस तकनीक के उपयोग से पानी की बचत के साथ-साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
वर्तमान में श्री चंद्राकर खरीफ और रबी दोनों सीजन में धनिया, प्याज और गेंदा जैसी नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं। उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम यह है कि केवल धनिया की फसल से ही उन्हें प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग 50 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है।
उनकी यह सफलता अब सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से प्रभावित होकर अन्य किसान भी अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
प्रमोद चंद्राकर की यह कहानी यह संदेश देती है कि यदि किसान नई तकनीक, सही योजना और मेहनत को अपनाएं, तो छोटी जमीन पर भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है।