किसानों की समस्याओं पर सरकार गंभीर नहीं, धान भुगतान के बाद भी खाद संकट और बिजली समस्या बरकरार – मानिक साहू

महासमुंद। जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष मानिक साहू ने जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी की राशि किसानों को जारी कर दी गई है, लेकिन इसके बावजूद किसानों की कई महत्वपूर्ण समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
मानिक साहू ने बताया कि वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में महासमुंद जिले में लगभग 1.80 लाख से अधिक किसानों ने धान विक्रय हेतु पंजीयन कराया, जिनके माध्यम से करीब 12 से 14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। उन्होंने कहा कि धान भुगतान मिलने के बाद भी किसानों को खाद-बीज की कमी, बिजली आपूर्ति और सिंचाई की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि रबी और आगामी खरीफ सीजन के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सहकारी समितियों में किसानों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है, वहीं निजी दुकानों में अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति नियमित नहीं है। किसानों को कई स्थानों पर 6 से 8 घंटे भी लगातार बिजली नहीं मिल पा रही, जिससे सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है। नहरों में पानी की कमी के कारण किसान बोरवेल पर निर्भर हो गए हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।
मानिक साहू ने कहा कि बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को फसल बीमा की राशि समय पर नहीं मिल रही। कई किसानों के आवेदन अभी भी लंबित हैं, जिससे उन्हें आर्थिक राहत नहीं मिल पा रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के कुछ धान उपार्जन केंद्रों में तौल में गड़बड़ी, फर्जी रजिस्ट्रेशन और भुगतान से संबंधित शिकायतें भी सामने आई हैं। इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही उन्होंने सरकार से खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाने, किसानों को नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति दी जाए, फसल बीमा एवं मुआवजा राशि का शीघ्र वितरण किया जाए, उपार्जन केंद्रों में गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो किसान कांग्रेस द्वारा जिला स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।