बच्चे के लिए जिन आंखें में कभी चिंता से भरी थीं, चिरायु टीम ने जिंदगी बदल दी
जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित सिद्धार्थ की हुई सफल सर्जरी
महासमुंद। नगर के तांडी परिवार के लिए वह समय किसी दु:स्वप्न से कम नहीं था, जब उनका मात्र 1 वर्ष 2 माह का मासूम बेटा सिद्धार्थ एक गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित पाया गया। नाजुक हालत और आर्थिक तंगी ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया था। हर दिन उम्मीद और डर के बीच गुजर रहा था—क्या उनका बेटा फिर से सामान्य जीवन जी पाएगा । इसी अंधेरे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शहरी चिरायु टीम उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। आंगनबाड़ी केंद्र में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने सिद्धार्थ की गंभीर स्थिति को तुरंत पहचान लिया और बिना समय गंवाए उसे नि:शुल्क उपचार के लिए चिन्हित किया। चिरायु टीम के मार्गदर्शन में सिद्धार्थ को रायपुर स्थित नारायणा एमएमआई हॉस्पिटल में रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता बताई। यह पल परिवार के लिए बेहद भावुक था, लेकिन इस बार उनके साथ था, सरकारी योजना का सहारा और डॉक्टरों का भरोसा। डॉक्टरों की कुशलता और समय पर मिले उपचार से सिद्धार्थ की सफल सर्जरी की गई। करीब 10 दिनों तक विशेषज्ञ निगरानी में रहने के बाद उसकी सेहत में तेजी से सुधार हुआ और अंतत: उसे पूर्णत: स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिल गई। आज वही सिद्धार्थ अपने घर में हंसता-खिलखिलाता जीवन जी रहा है। उसकी मुस्कान अब परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी बन चुकी है। जो आंखें कभी चिंता से भरी थीं, आज उनमें राहत और आभार साफ झलकता है। परिजन कहते हैं कि अगर चिरायु टीम समय पर नहीं पहुंचती, तो शायद आज हमारा बेटा हमारे साथ नहीं होता। इस कार्य में शहरी चिरायु टीम डॉ. सुजाता शुक्ला, डॉ. विकास चौहान, चंद्रकला साहू सहित टीम की भूमिका रही।
