उठाव के लिए 31 तक का समय, केंद्रों में 29 लाख क्विंटल धान डंप

महासमुंद। जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान को खरीदी केन्द्रों से उठाने के लिए 31 मार्च तक परिवहन की समय-सीमा तय है, लेकिन अब भी करीब 29 लाख क्विंटल धान खरीदी केंद्रों में पड़ा हुआ है। ऐसे में लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए अब प्रतिदिन लगभग 1 लाख क्विंटल धान का उठाव करना जरूरी हो गया है। वर्तमान गति से ही कार्य चलता रहा तो निर्धारित समय-सीमा में पूरा परिवहन कर पाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
बता दें कि इस खरीफ विपणन वर्ष में जिले के 182 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 1 करोड़ 1 लाख 95 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई। समर्थन मूल्य पर 1 लाख 49 हजार 759 किसानों ने धान बेचा। प्रशासन द्वारा किसानों को भुगतान की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है, जिससे किसानों को आर्थिक संबल मिला है। हालांकि अब भंडारण और परिवहन की धीमी रफ्तार ने समितियों और अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। होली से पहले जिले के कुल 182 खरीदी केन्द्रों से कुल 72 लाख क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है, जबकि अभी भी 29 लाख क्विंटल धान विभिन्न उपार्जन केंद्रों में जाम है। कई स्थानों पर गोदामों की सीमित क्षमता के कारण धान को खुले में रखना पड़ रहा है। ऐसे में तिरपाल से ढंकने, नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त परिश्रम और खर्च भी बढ़ रहा है। समितियों का कहना है कि यदि उठाव की रफ्तार नहीं बढ़ी तो धान की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं होली के कारण पिछले तीन दिनों से हमालों की उपलब्धता न होने से धान का उठाव नहीं हो पाया है।
‘समय-सीमा के भीतर शेष धान का उठाव के निर्देश’
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए समय-सीमा के भीतर शेष धान का उठाव सुनिश्चित करने को कहा है। उनका कहना है कि यदि प्रतिदिन औसत 1 लाख क्विंटल धान का परिवहन किया जाता है, तभी 31 मार्च तक शेष धान का उठाव संभव हो सकेगा। मालूम हो कि पहले कुछ दिनों के लिए धान के परिवहन पर रोक लगाए जाने के कारण भी उठाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। अब समय कम और लक्ष्य बड़ा है। ऐसे में संबंधित विभागों के बेहतर समन्वय, पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता और सतत निगरानी से ही जिले में धान उठाव का लक्ष्य तय समय-सीमा में पूरा किया जा सकेगा।