नहर लाइनिंग के लिए लाए गए मजदूर पाई-पाई को मोहताज, कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

मंडला से लाए गए थे मजदूर, ठेकेदार से मेहनताना नहीं मिलने से आर्थिक संकट का कर रहे सामना
महासमुंद। मध्यप्रदेश से मजदूरी और बेहतर रोज़गार के वादे पर नहर लाइनिंग कार्य के लिए लाए गए दर्जनों मजदूर पिछले तीन महीनों से अपनी मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अब हालात यह है कि घर वापसी के लिए भी उनके पास पैसे नहीं है। भुगतान न मिलने से तंग आकर वे अपने परिवारों महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
कलेक्टोरेट कार्यालय पहुचें मजदूर कृष्ण कुमार करचाम ने बताया कि उन्हें समय पर वेतन और बेहतर सुविधाओं का भरोसा देकर काम पर लगाया गया था। शुरुआती दिनों में भुगतान का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे रकम अटकती चली गई। आरोप है कि ठेकेदार दैनिक खर्च के नाम पर महज़ 400-500 रुपये देता रहा, जो पूरे परिवार के भरण-पोषण के लिए नाकाफी थे। अब तक करीब 4.50 लाख रुपये का भुगतान बकाया बताया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि जब उन्होंने बकाया मांगा तो ठेकेदार ने टालमटोल शुरू कर दी। पिछले कुछ समय से फोन उठाना भी बंद कर दिया गया है। इससे मजदूर खुद को ठगा हुआ और असहाय महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे पिछले चार दिनों से भूखे हैं। राशन खत्म हो चुका है और जेब में इतना पैसा भी नहीं बचा कि अपने गृह नगर मंडला लौट सकें। छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ खुले परिसर में बैठकर वे प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
जिला प्रशासन से न्याय की मांग
पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ठेकेदार पर तत्काल कार्रवाई हो, औरि बकाया 4.50 लाख रुपये का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, भोजन और सुरक्षित घर वापसी की व्यवस्था की जाए। यह घटना एक बार फिर प्रवासी मजदूरों के शोषण की हकीकत उजागर करती है। जहां बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर उनके श्रम और अधिकारों की अनदेखी की जाती है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इन परिवारों को कब और कैसे राहत मिलती है।

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