गरीब कल्याण के सरकारी दावे, राशन के लिए भटक रहे गरीब : मानिक
महासमुंद। फरवरी माह का अंतिम दिन होने के बावजूद बड़ी संख्या में राशन कार्ड हितग्राही खाद्यान्न प्राप्त नहीं कर सके। जानकारी के अनुसार जिले के लगभग 40 प्रतिशत हितग्राही राशन से वंचित हैं और सुबह से शाम तक उचित मूल्य दुकानों के चक्कर लगाने मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस महासमुंद के जिला अध्यक्ष मानिक साहू ने कहा कि सरकार गरीब कल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नवंबर माह का राशन आज भी लगभग 40 से 45 प्रतिशत हितग्राहियों को नहीं मिल पाया है, जिससे लोगों में असंतोष और चिंता बढ़ती जा रही है।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही है कि कई राशन दुकानों में स्टॉक की कमी, वितरण में देरी और तकनीकी समस्याओं के कारण हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं मिल पा रहा है। गरीब परिवारों, मजदूर वर्ग और दैनिक आय पर निर्भर लोगों के सामने खाद्यान्न संकट की स्थिति बनती जा रही है।
मानिक साहू ने कहा कि जिन परिवारों को पिछले वर्ष नवंबर का चावल नहीं मिला, वे अब फरवरी माह के राशन को लेकर भी आशंकित हैं। उन्होंने कहा कि शासन की लापरवाही का खामियाजा सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। कई हितग्राही रोजाना राशन दुकान पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘अभी स्टॉक नहीं आया’ या ‘अगले सप्ताह आना’ कहकर वापस भेज दिया जा रहा है। उन्होंने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक ओर सरकार योजनाओं के प्रचार में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर गरीबों का हक समय पर नहीं मिल पा रहा है। यदि राशन वितरण व्यवस्था इतनी ही प्रभावी है तो हजारों हितग्राही राशन के लिए भटक क्यों रहे हैं।
किसान कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि नवंबर माह का लंबित राशन तत्काल उपलब्ध कराया जाए तथा फरवरी माह के राशन वितरण की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 मार्च तक की जाए, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही खाद्यान्न से वंचित न रहे। साथ ही जिलेभर की उचित मूल्य दुकानों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।मानिक साहू ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसान कांग्रेस हितग्राहियों के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने बाध्य होगी।
