हथियार समेत 73 लाख के इनामी 15 नक्सलियों ने किया सरेंडर

बीबीएम कमेटी के सदस्यों का छत्तीसगढ़ – ओडिशा पुलिस ने संविधान-तिरंगा से किया स्वागत
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक बड़ी सफलता मिली है। परसदा पुलिस लाइन में ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत 73 लाख रुपये के इनामी 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 9 महिला नक्सली शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिविजनल कमेटी (BBM) के सदस्य थे। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ का रायपुर पुलिस रेंज और ओडिशा का संबलपुर रेंज पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गया है।
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने 3 AK-47, 2 SLR, 2 INSAS, 4-303 राइफल और 3-12 बोर सहित कुल 14 हथियार पुलिस को सौंपे। छत्तीसगढ़ और ओडिशा पुलिस ने सभी नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया। उन्हें संविधान की प्रति, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और गुलाब का फूल भेंट किया गया, ताकि वे मुख्यधारा में लौट सकें।
आत्मसमर्पण करने वालों में एक स्टेट कमेटी सदस्य, तीन डिविजनल कमेटी सदस्य, चार एरिया कमेटी सदस्य और सात पार्टी सदस्य शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण अभियान ‘पुना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत आयोजित किया गया था।
बलांगरी – बरगढ़ – महासमुंद (बीबीएम) डिवीजन के 15 नक्सलियों ने रात सरायपाली के जंगल के रास्ते जिले के बलौदा थाने में सरेंडर कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में ओडिशा राज्य कमेटी के पश्चिमी सब जोनल ब्योरा सचिव विकास उर्फ सुदर्शन भी शामिल है। जिस पर 25 लाख का इनाम रखा गया था। परसदा पुलिस लाइन में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ नक्सल विरोधी अभियान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा, नार्दन रेंज संबलपुर ओडिशा के पुलिस महानिरीक्षक हिमांशु लाल, रायपुर ग्रामीण जोन के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, पुलिस महानिरीक्षक बीएस ध्रुव, महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, ओडिशा बरगढ़ एसपी प्रहलाद सहाय मीना, बलांगीर एसपी अभिलाष जी और महासमुंद एसपी प्रभात कुमार उपस्थित थे। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के सहयोग से 2024 से नक्सल मुक्त भारत बनाने की दिशा में पुनर्वास अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ और ओडिशा के नक्सली भी आम लोगों की तरह मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन 15 नक्सलियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें स्टेट कमेटी सदस्य पर 25 लाख रुपये, दो डिविजनल कमेटी सदस्यों पर 8-8 लाख रुपये, पांच एरिया कमेटी सदस्यों पर 5-5 लाख रुपये और सात पार्टी सदस्यों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम रखा गया था।
इन नक्सलियों ने 14 अत्याधुनिक एवं ऑटोमैटिक हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया है, जिसमें 3 एके 47, 2 एस एल आर, 2 इंसास, 4 -303 और 3 – 12 बोर शामिल है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकनंद सिन्हा ने बताया कि महासमुंद जिले की सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय बरगढ़ बलांगीर महासमुंद डिवीजन कमेटी (डीवीसी) के सदस्य को आत्मसमर्पण करने के लिए विभिन्न माध्यमों से संपर्क किया गया।
इनमें आकाशवाणी, बैनर, पोस्टर, पंपलेट तथा अन्य संवाद माध्यमों से लगातार अपील किया जा रहा था। संवाद माध्यमों से शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत समर्पण करने पर पद अनुरूप इनामी राशि की सुविधा ,हथियार के साथ समर्पण करने पर इनाम राशि की सुविधा, बीमार होने पर स्वास्थ्य सुविधा, आवास एवं रोजगार व्यवस्था किया जाएगा।
माओवादी विचारधारा जंगलों में घूमने से आने वाली परेशानियां परिवार से दूरी तथा पूर्व में समर्पण किए कई माओवादी को आत्मसमर्पण नीति की योजनाओं का लाभ उठाते हुए परिवार के साथ खुशहाल जीवन निर्वाह कर रहे हैं। इसे देखकर और भी जो माओवादी है हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का निर्णय ले रहे हैं एवं बम कमेटी के 15 सदस्यों द्वारा जिला पुलिस में सुमन के समक्ष हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया गया। सभी 15 माओवादी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ओडिशा राज्य कमेटी के सदस्य थे। ओडिशा राज्य कमेटी के अंतर्गत ओडिशा और छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी जोन के बरगढ़ बलांगीर महासमुंद डिवीजन के सदस्य थे। संगठनात्मक रूप से यह तीन अलग-अलग एरिया कमेटी में विभाजित थे।
ओडिशा स्टेट कमेटी और बीबीएम डिवीजन का निर्माण 2010 के बाद हुआ था, नक्सलियों में सबसे सीनियर विकास उर्फ सुदर्शन उर्फ जंगू उर्फ़ बाबन्ना उर्फ राजन्ना उर्फ मुप्पीड़ी सांबाईह (57) ग्राम तारलापल्ली थाना हनुमाकोंडा जिला वारंगल तेलंगाना का मूल निवासी है। जो 1985 से संगठन में सक्रिय विकास तेलंगाना स्टेट जनरल कमेटी में 10 साल, डीकेएसजेसी के दक्षिण सब जोन का सचिव 2 साल गडचिरोली डिवीजन का प्रभारी पद पर कार्य करने के बाद ओडिशा स्टेट कमेटी के निर्माण करने वाले नक्सलियों में से एक है। डिवीजनल कमेटी सदस्य मंगेश 2010 में ओडिशा आने से पहले डीकेएसजेसी के उत्तर बस्तर डिवीजन के प्लाटून 5 का सदस्य था। डिवीजनल कमेटी सदस्य बाबू 2010 में ओडिशा आने से पहले डीकेएसजेसी के माड डिवीजन के प्लाटून एक का सदस्य था। दोनों पर आठ लाख का इनाम है। नक्सलियों में 6 सदस्य नीला,सोनू, रीना, दिनेश, दीपना, रानीला केंद्रीय कमेटी सदस्य चलपति के गार्ड के रूप में काम करते थे। गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ में माओवादी का पहला केंद्रीय कमेटी सदस्य मर गया था, जिसके बाद 6 सदस्यों का ट्रांसफर होकर बीबीएम में विकास के साथ काम करते थे। इन 15 नक्सलियों के आत्म समर्पण के बाद ओडिशा राज्य कमेटी का पश्चिमी सब जोन जिसमें एक साल पहले तक 2 डिवीजन और 7 एरिया कमेटी था जो पूरी तरह से समाप्त हो गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर पुलिस रेंज के साथ-साथ उड़ीसा का संबलपुर रेंज पूर्ण रूप से नक्सली मुक्त हो गए हैं मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समय उन्मूलन की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा ने अपील करते हुए कहा कि बस्तर के बचे हुए नक्सली और ओडिशा के पूर्वी सब जोन के नक्सली भी हथियार डाल दे, और संविधान एवं तिरंगा झंडा थाम कर विश्वास सुरक्षा और विकास का रास्ता चुने। उन्होंने कहा कि राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति संवाद एवं विकास पर केंद्रित शतत प्रयासों के परिणाम स्वरूप पूना मारगेम- पुनर्वास से पुनर्जीवन कार्यक्रम के अंतर्गत माओवादी कैडर ने हिंसा का मार्ग त्याग कर संविधान लोकतंत्र और विकास की मुख्य धारा में लौटने का संकल्प किया है।