कलेक्टर नम्रता जैन ने दिखाई बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत् जिले में जागरूकता अभियान तेज
नारायणपुर, 06 फरवरी 2026// बाल विवाह मुक्त भारत अभियान भारत में बाल विवाह उन्मूलन की एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, उत्तम स्वास्थ्य एवं कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा लैंगिक समानता जैसे सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना है। यह अभियान बाल विवाह की रोकथाम हेतु नागरिकों की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित करता है।
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में समर्पित संस्था नारायणपुर द्वारा संचालित एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन प्रोजेक्ट के अंतर्गत 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम के तहत बाल विवाह मुक्ति रथ को 05 फरवरी को कलेक्टर नम्रता जैन एवं जिला पंचायत सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ 8 मार्च तक पूरे नारायणपुर जिला का गांवों से गुजरेगा। समर्पित संस्था बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन देश के 450 जिलों में बाल विवाह के खात्मे व बाल संरक्षण तंत्र को मजबूती देने के लिए काम कर रहे हैं।
बाल विवाह मुक्ति रथ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समर्पित सेंटर फॉर पावर्टी एलिविएशन एंड सोशल रिसर्च के निदेशक डा.संदीप शर्मा ने कहा, “यह इस कुप्रथा के विरुद्ध निरंतर संदेश देता है और पंचायतों, शिक्षकों तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को साथ जोड़कर जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव बनाने में सहायक है। बाल विवाह की रोकथाम के बाबत जागरूकता समुदाय के भीतर से आनी चाहिए और यह रथ लोगों के दरवाजे तक संदेश पहुंचाकर वही सामूहिक चेतना पैदा करता है। छत्तीसगढ़ सरकार इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रही है और हम सब मिलकर बच्चों के खिलाफ इस अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के इसी तरह के ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ इस समय देश के 25 राज्यों के 451 जिलों में यात्रा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के 11 जिलों में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के छह सहयोगी संगठन जमीन पर कार्य कर रहे हैं।
अभियान के तहत 06 फरवरी को जिले के ग्राम मुरियापारा, कस्तुरमेटा, मोहंदी, आकाबेड़ा, नेड़नार और कुतुल के आंगनबाड़ी एवं स्कूलों में बच्चों को बाल विवाह की रोकथाम के संबंध में जागरूक किया गया तथा उनसे बाल विवाह न करने की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन कर ग्रामीणों को बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी जा रही है और बाल विवाह न करने की सामूहिक शपथ भी दिलाई जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से बाल विवाह रोकथाम को लेकर जन-जागरूकता लगातार बढ़ाई जा रही है, ताकि बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ एवं सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के अनुसार, जो भी बाल विवाह का आयोजन करता है, उसे बढ़ावा देता है, जानबूझकर उसमें भाग लेता है या बाल विवाह से संबंधित किसी भी प्रकार की सेवा प्रदान करता है, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
