शिव ही प्रकृति हैं, इसलिए हमें प्रकृति से प्रेम और उसका संरक्षण करना चाहिए: पं. कमलेश प्रसाद
शिव महापुराण कथा से इमलीभाठा में गूंजा शिव महिमा का संदेश
महासमुंद। ईमलीभाठा में आयोजित शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। कथा वाचन करते हुए पं. कमलेश प्रसाद दुबे (कांपा वाले) ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के स्पर्श मात्र से प्रसाद पवित्र हो जाता है और चन्द्रायन व्रत के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पं. दुबे ने बताया कि भगवान शिव को बिल्व वृक्ष (बेल का पेड़) अत्यंत प्रिय है। उन्होंने श्रद्धालुओं से बिल्व वृक्ष लगाने और उसकी पूजा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सोमवार की अष्टमी को बेल वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाकर तथा किसी जरूरतमंद को भोजन कराने से गंभीर रोग और दरिद्रता दूर होती है तथा भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कथा के दौरान उन्होंने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि शिव ही प्रकृति हैं, इसलिए हमें प्रकृति से प्रेम और उसका संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिव मंदिर को स्वच्छ और प्रकाशित रखना शिव भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा अच्छी संगति से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। पं. दुबे ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए टेकराम सेन ने बताया कि कथा प्रारंभ होने से पहले मोहल्ले की विभिन्न मानस मंडलियों द्वारा भक्ति-गीतों की सुमधुर प्रस्तुति दी जा रही है। आयोजनकर्ता अधिवक्ता संध्या साहू एवं उनके परिवार द्वारा कार्यक्रम की समुचित व्यवस्था की गई है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।
इस आयोजन की व्यवस्था में संध्या साहू, गीता साहू तथा साहू परिवार (सोनबांकड़ा) और कांपा-तुमगांव परिवार का विशेष योगदान रहा। अधिवक्ता संध्या साहू एवं परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।
