स्वर्ण समाज ने यूजीसी कानून के खिलाफ किया प्रदर्शन
महासमुंद। केंद्र सरकार द्वारा 13 जनवरी 2026 को पारित यूजीसी कानून के विरोध में जिले के समस्त सवर्ण समाज ने सोमवार को वृहद एवं ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम पर कलेक्टर महासमुंद को ज्ञापन सौंपा गया। मंगलवार दोपहर 12 बजे स्थानीय लोहिया चौक में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्र हुए। सभी प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया। पश्चात बाइक रैली लोहिया चौक से प्रारंभ होकर नेहरू चौक, कचहरी चौक, बरौंडा चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टोरेट पहुँची। सवर्ण समाज के प्रमुखों ने कहा कि केंद्र सरकार की यह नीति अव्यवहारिक, असंवैधानिक एवं समाज को विभाजित करने वाली है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूजीसी कानून को शीघ्र वापस नहीं लिया गया, तो सवर्ण समाज उग्र आंदोलन और भारत बंद का आह्वान करने विवश होगा। उन्होंने कि सवर्ण समाज ने सदैव देश, समाज और राजनीतिक दलों के हित में अपने व्यवसाय व उद्योग बंद कर सहयोग किया है, लेकिन अब अपने अधिकारों की रक्षा के लिए स्वयं के लिए संघर्ष करने का समय आ गया है। सवर्ण समाज का देश के विकास में ऐतिहासिक योगदान रहा है, बावजूद सरकार उन्हें वोट बैंक की राजनीति में बलि का बकरा बना रही है।
आंदोलन में ब्राह्मण, जैन, सिख, राजपूत क्षत्रिय, मराठा, छत्तीसगढ़ करण महंती, अग्रवाल, माहेश्वरी, सिंधी, गुप्ता, कायस्थ, गुजराती, बंग समाज एवं दक्षिण भारतीय ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी व सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए। रैली में महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। युवाओं ने काले वस्त्र धारण कर सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन सौंपने जाते समय रैली ने विधायक निवास एवं भाजपा कार्यालय के सामने केंद्र सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि राज्य स्तरीय बैठक में आगे की रणनीति तय की जा चुकी है। यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो सभी सवर्ण समाज के पार्षद, विधायक और सांसद चाहे वे किसी भी दल से हों सामूहिक इस्तीफा देने मजबूर होंगे।
