शालाओं का युक्तियुक्तकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विपरीत
युक्तियुक्तकरण तत्काल रोकने की मांग
महासमुंद। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष ओमनारायण शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शालाओं के युक्तियुक्तकरण को तत्काल रोकने की मांग की है। शर्मा ने उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य की शालाओं के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तथा प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा गुणवत्ता के लिए किये जा रहे प्रयासों के विपरीत होगा। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत 5+3+3+4 के ढाँचे के अनुसार 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के लिए पृथक -पृथक स्टेज निर्धारित कर स्वतंत्र एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा की व्यवस्था निर्धारित की गई है। प्रथम 5 वर्ष को फाउंडेशनल स्टेज के रूप में माना गया है। जिसमें आयु 3 से 8 वर्ष के बच्चों के लिए स्वतंत्र व मुक्त शिक्षण की व्यवस्था है। जिसके अंतर्गत 3 वर्ष प्री-स्कूल और 2 वर्ष कक्षा 1 व 2 शामिल है। आगे 3 वर्ष जिसे प्रारंभिक स्टेज का नाम दिया गया है, उसमें आयु 8-11 वर्ष के लिए कक्षा 3 से 5 शामिल है। आगे 3 वर्ष मिडिल स्टेज में 11 से 14 वर्ष अर्थात कक्षा 6 से 8 शामिल है। फिर 4 वर्ष जो सेकेंडरी स्टेज होगा। इसमें 14 से 18 वर्ष में कक्षा 9 से 12 शामिल है, यह ढांचा पुराने 10+2 मॉडल को बदलता है और बच्चों के समग्र विकास, लचीली शिक्षा और आयु-उपयुक्त शिक्षण पर जोर देता है। शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हवाला देते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में शालाओं का युक्तियुक्तकरण कर एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्वतंत्र एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होगी। कई प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं हाईस्कूल में पदस्थ प्रधानपाठक व प्राचार्य पावरलेस हो जाएंगे। क्योंकि, उनकी गणना शिक्षक के रूप में होगी ऐसे में उन पदों का क्या औचित्य होगा यह स्पष्ट नहीं है। न्यायालय द्वारा भी डीएड एवं बीएड प्रशिक्षण प्राप्त लोगों की शिक्षण योग्यता निर्धारित कर दी गई है, ऐसे में पूर्व प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक संस्थाओं को एकीकृत करने से प्रशासनिक व शैक्षणिक समस्याएं उत्पन्न होंगी जिससे गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है। साथ ही राज्य शासन द्वारा 2008 में लागू सेटअप का उल्लंघन होगा जबकि उसी के अनुसार शिक्षकों की भर्ती एवं पदोन्नति की गई है।
