गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ी नल वाला मटके की डिमांड
प्राकृतिक रूप से पानी को ठंडा रखता है मटका
महासमुंद। अप्रैल महीने में तेज गर्मी का पड़ना शुरू हो गया है। दिन में अधिकतम तापमान 38-39 डिग्री तक पहुंच रहा है और जल्द ही 40 पार करने की संभावना है। गर्मी का मौसम आते ही जहां एक ओर लोग फ्रिज और कूलर की ओर भागते हैं, वहीं दूसरी ओर इन दिनों देशी फ्रीज कहे जाने वाला मटका फिर से लोगों का ध्यान खींच रहा है।
बता दें कि बाजार में इन दिनों नल वाला मटका की खूब मांग है। यह न सिर्फ पानी ठंडा रहता है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल, सेहतमंद और किफायती भी है। कुम्हारपारा से मटका बेचने पहुंचे परमेश्वर चक्रधारी, मुकुंद चक्रधारी, कलिन्द्री चक्रधारी व यामिनी चक्रधारी ने बताया कि ये खास घड़े लाल मिट्टी से बनाए जाते हैं, जो प्राकृतिक रूप से पानी को ठंडा रखने की क्षमता रखते हैं। अब इसमें नल भी जोड़ दिया गया है, जिससे पानी निकालने में भी सहूलियत होती है और बार-बार ढक्कन खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। बाजार में साधारण मटका 80 से 100 व नल वाला मटका 150 से 170 रुपए बेचे जा रहे हैं। मालूम हो कि आधुनिकता के इस जमाने भी कई लोग आज भी गर्मी में मिट्टी का घड़ा इस्तेमाल करते हैं। कई सालों से बाजार में नल लगा मटका बिक रहा है जो फायदेमंद भी है।
ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर
नल वाले मटकों की लोकप्रियता से कुम्हारों की आमदनी भी बढ़ी है। परमेश्वर चक्रधारी ने बताया कि लोग पहले प्लास्टिक के वाटर कूलर खरीद लेते थे, लेकिन अब फिर से घड़ों की मांग बढ़ी है। नल वाला घड़ा तो लोगों को और भी ज्यादा पसंद आ रहा है। उन्होंने आगे बताया कि एक घड़ा बनाने की पूरी प्रक्रिया में करीब 3-4 दिन लगते हैं। उन्होंने कहा कि अब वह स्थानीय प्लंबरों की मदद से इनमें छोटे-छोटे नल भी फिट कर रहे हैं। इससे न सिर्फ परंपरा को नया रूप मिल रहा है, बल्कि ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर मिल रहा है।
मटके का पानी शरीर के तापमान के अनुकूल
चिकित्सकों के अनुसार भी मटके का पानी शरीर के तापमान के अनुकूल रहता है और यह पाचन तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसमें कोई रासायनिक प्रक्रिया नहीं होती और न ही यह बिजली पर निर्भर होता है। यही कारण है कि इसे देसी फ्रिज भी कहा जाता है। इसके साथ ही कुम्हारों को रोजगार का साधन भी मिल जाता है। इसलिए सभी लाभ को देखते हुए पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा दें और मिट्टी के घड़ों का प्रयोग करें।
शहर में सार्वजनिक प्याऊ पर पालिका का ध्यान नहीं
शहर में कई सार्वजनिक स्थानों में पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। पालिका द्वारा बस स्टैंड का वाटर एटीएम कई साल से बंद है। लोहिया चौक में महंती समाज द्वारा हाल ही में सार्वजनिक प्याऊ शुरू किया गया व बीटीआई रोड में भी एक सार्वजनिक प्याऊ संचालित है शेष अब तक किसी भी सार्वजनिक स्थान में पालिका व अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा प्याऊ तक नहीं खोले गए हैं। इससे लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। खासकर गांव-गांव से आने वालों को पानी के लिए ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है। नगर पालिका के जल प्रभारी सीताराम तेलक ने बताया कि हर साल बस स्टैंड व नकुल ढीढी उद्यान के पास पालिका की ओर से सार्वजनिक प्याऊ खोला जाता है पर अभी तक इस संबंध में कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
