प्राण प्रतिष्ठा में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुए विभिन्न संस्कार

महासमुंद। नगर की कुलदेवी महामाया में नवनिर्मित मंदिरों में 10 देवी देवताओं का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह विधि-विधान से किया गया। पांच दिवसीय इस आयोजन में महामाया तालाब के पार में बने यज्ञ मंडप में आचार्य पंडित पंकज तिवारी ने पुरोहितों दिनेश चौबे, नरेश दीवान, रिकेश दुबे, उत्कृष्ट शुक्ला, हेमंत द्विवेदी, रोशन महाराज के साथ वास्तु पूजन यज्ञ, देवताओं के नेत्रोनयन, आईना दर्शन, वेदी पूजन, देवी प्रतिष्ठा, शिव प्रतिष्ठा, दुग्धाभिषेक समेत अनेक विधान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया। पूजन विधान में यजमान के रूप में अमरनाथ साहू, विवेक दवे, हीरालाल साहू, कापसे परिवार, विजय चंद्राकर, हेमंत बघेल, हलकूराम साहू इत्यादि शामिल हुए। महामाया मंदिर के मुख्य द्वार से लगकर 10 देवी-देवताओं के लिए मंदिरों का निर्माण किया गया है। जिसमें शिवलिंग, श्री राधा कृष्ण, श्री राम दरबार, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री गणेश, श्री हनुमान, श्री काली माता, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री गणेश, श्री हनुमान, श्री काली माता, श्री लक्ष्मी माता, सरस्वती व श्री संतोषी माता विराजित की गई।
महामाया मंदिर समिति के कन्हैया शुक्ला, खोरबाहरा साहू, कमलेश चंद्राकर, पूर्णेंद्र चंद्राकर, मूलचंद कोचर, सोनू बजाज, भाऊराम साहू, राजेश नायक, ईश्वर साहू, नेमीचंद सोनी ने नगरवासियों से दर्शन लाभ लेने और भंडारा में शामिल होने का आग्रह किया है। आचार्य पंडित पंकज तिवारी ने बताया कि किसी भी स्थल में यज्ञ हवन इत्यादि हो तो यज्ञ स्थल की परिक्रमा करनी चाहिए। इससे यज्ञ स्थल में विराजित सभी देवी-देवताओं के परिक्रमा का फल मिलता है। उन्होंने बताया कि जहां विराजित सभी देवी-देवताओं का पहले जलाधिवास, अन्नाधिवास, फलाधिवास, मेवाधिवास, पुष्पाधिवास कराकर प्राण फलाधिवास, मेवाधिवास, पुष्पाधिवास कराकर प्राण प्रतिष्ठा विस्तार की विधि पूर्ण की गई। महाभारत में अर्जुन को दिव्य दृष्टि मिलने के बाद ही वे भगवान के दर्शन कर पाए थे। मनुष्यों में इतनी शक्ति नहीं होती कि वह सीधे भगवान का दर्शन कर सकें। इसलिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह में यह भाव रहता है कि भगवान जब अपना नयन खोले तो सबसे पहले भगवान दर्पण में खुद को देखें, बाद भक्तों को दर्शन दें। इसलिए प्राण प्रतिष्ठा के बाद जैसे ही भगवान का नयन खोला गया उन्हें दर्पण दिखाने की विधि पूर्ण की गई।