योग शरीर, मन एवं भावनाओं को स्वस्थ, संतुलित रखने की विद्या-स्वामी विद्यानंद
योग प्रशिक्षण शिविर मे दीर्घशंख प्रक्षालन 29 दिसंबर को
महासमुंद। दिव्य जीवन संघ, योग मित्र मंडल एवं मातृशक्ति संस्कृति के संयोजन में 10 दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर शिवानंद कुटीर योगाश्रम के संचालक एवं योगाचार्य स्वामी विद्यानंद सरस्वती के संचालन में 20 दिसम्बर से प्रारंभ हो चुका है। शिविर में प्रत्येक दिन सुबह आसान, प्राणायाम एवं ध्यान, शाम को प्राणायाम, योगनिद्रा एवं त्राटक एंव दोपहर सत्र में महिलायों को योग का अभ्यास कराया जा रहा है। शिविर में बड़ी संख्या में लोग योग प्रशिक्षण एवं योग चिकित्सा का लाभ ले रहे हैं।
29 दिसम्बर को कौंदकेरा जंगल में दीर्घशंख प्रक्षालन के अलावा जलनेति, कुंजल आदि हठयोग की यौगिक क्रियाएं संपन्न होगी। स्वामी विद्यानंद सरस्वती ने अभ्यास सत्र के दौरान बताया कि योग जीवन पद्धति है। यह जीने की कला है। यह शरीर, मन एवं भावनाओं को स्वस्थ, संतुलित रखने की विद्या है। योग के अभ्यास से केवल स्वास्थ्य की रक्षा ही नहीं होती बल्कि दैनिक जीवन में शारीरिक, मानसिक एवं भावात्मक रोगों का उपचार भी संभव है। यह जीने की अन्य उपायों की तुलना में सरल, वैज्ञानिक तथा जीवन की हर अवस्था में व्यवहारिक एवं पूर्ण है। उन्होंने कहा कि शंख प्रक्षालन पेट की यौगिक सफाई का तरीका है। यह योग की सर्वाधिक पूर्ण व शक्तिशाली प्रक्रिया है। साधारण उपवास द्वारा जो परिणाम हफ्तों या महिनों बाद सामने आते हैं उनका अनुभव इस क्रिया के माध्यम से 3-4 घंटे बाद होने लगता है। यद्यपि इसका गहरा प्रभाव शारीरिक स्तर पर ही दिखाई देता है। परंतु यह क्रिया मन और प्राण पर गहरा प्रभाव डालती है। 10 दिवसीय योग शिविर में आसन प्राणायाम के अभ्यास के बाद अंत में शरीर दीर्घशंख प्रक्षालन की क्रिया के लिए तैयार किया जाता है, इस वर्ष भी 29 दिसम्बर 24 को कौंदकेरा के जंगल में योगाभ्यार्थियों को जलनेति, कुंजल एवं दीर्घ शंख प्रक्षालन क्रिया खाली पेट में करना होता है। पूर्ण क्रिया हेतु 16 गिलास कुनकुने जल की आवश्यकता होती है। स्वामी जी ने बताया कि शंख प्रक्षालन के बाद न केवल हल्कापन अनुभव किया जा सकता है, बल्कि चेतना में भी एक स्पष्ट परिवर्तन अनुभव किया जा सकता है। इसका अभ्यास अनेक व्याधियों अचेतन, मानसिक कब्ज एवं शारीरिक कब्ज को दूर करता है शरीर के शोधन के साथ मन का भी शोधन होता है सजगता की वृद्धि होती है। 30 दिसम्बर को प्रातः सत्र के पश्चात शिविर के समापन का कार्यक्रम रखा गया है।
