पैरा-नरई अब बनेगा कमाई का जरिया, सीबीजी परियोजनाओं को मिलेगा बढ़ावा

सीबीजी नीति के क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक आयोजित
कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश
बिलासपुर, 27 अक्टूबर 2026/कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आज मंथन सभाकक्ष में जिला स्तरीय कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) मॉनिटरिंग समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ कंप्रेस्ड बायोगैस नीति 2026 की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में सबसे पहले जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक यहां आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि पैरा-नरई जलाने के बजाय किसानों को उसका उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेषों का उपयोग बायोगैस उत्पादन में होने से किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। कलेक्टर ने सीबीजी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने तथा इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में छत्तीसगढ़ सीबीजी नीति 2026 के प्रावधानों, जिला स्तरीय समिति के गठन के उद्देश्य एवं प्रमुख दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। परियोजनाओं के लिए आवश्यक फीडस्टॉक के रूप में पैरा-नरई सहित कृषि अवशेष, बायोमास, नगरीय ठोस अपशिष्ट एवं अन्य जैविक संसाधनों की उपलब्धता तथा नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया। कलेक्टर ने कहा कि पैरा-नरई का व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित होने से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा और खेतों में नरई जलाने की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी। बैठक में प्रत्येक विकासखंड में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन, किसानों एवं परियोजना संचालकों के बीच समन्वय तथा भारत सरकार की महत्वाकांक्षी गोबरधन योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। नगरीय निकायों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट एवं गोबर की नियमित आपूर्ति, परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने समिति के सदस्यों को जिले में सीबीजी परियोजनाओं की स्थापना एवं संचालन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। बैठक में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, ऊर्जा विभाग के सहायक परियोजना अधिकारी लव त्यागी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।