धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल, किसानों की बढ़ी चिंता
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में 16 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने की तैयारियों के बीच पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राजस्व पटवारी संघ 13 अक्टूबर से पीवी ऐप के जरिए फसल के भौतिक सत्यापन में आ रही तकनीकी एवं व्यवहारिक दिक्कतों, वेतन विसंगति, पदोन्नति और पटवारियों पर की जा रही कार्रवाई के विरोध में आंदोलनरत है। धान खरीदी से ठीक पहले राजस्व संबंधी कामकाज प्रभावित होने की आशंका के चलते यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमाने लगा है।
फसल सत्यापन और किसान पंजीयन पर पड़ सकता है असर
धान खरीदी की प्रक्रिया में फसल सत्यापन, किसान पंजीयन और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्य महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में पटवारियों की हड़ताल लंबी खिंचने पर किसानों को जरूरी राजस्व कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। किसान कांग्रेस ने आशंका जताई है कि इसका सीधा असर धान खरीदी की तैयारियों पर पड़ सकता है।
किसान कांग्रेस ने सरकार को घेरा
महासमुंद जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष मानिक साहू ने सरकार से पटवारी संघ के साथ तत्काल बातचीत कर गतिरोध समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार 16 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजस्व व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल के कारण किसानों के जरूरी काम अटकने की स्थिति बन रही है। सरकार को किसानों की परेशानी को देखते हुए समय रहते समाधान निकालना चाहिए।
पीवी ऐप समेत कई मुद्दों पर पटवारियों का विरोध
पटवारी संघ का कहना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्र, जनगणना सहित कई विभागीय दायित्वों के बीच पीवी ऐप से फसल सत्यापन का काम व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। संघ ने बलौदाबाजार और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में पदाधिकारियों के स्थानांतरण तथा महासमुंद जिले में तीन पटवारियों के निलंबन का हवाला देते हुए कार्रवाई वापस लेने की मांग की है। इसके अलावा वेतन विसंगति और पदोन्नति के लंबित मामलों का निराकरण भी संघ की प्रमुख मांगों में शामिल है।
समय रहते नहीं सुलझा गतिरोध तो बढ़ सकती है परेशानी
धान खरीदी की तारीख नजदीक आने के साथ पटवारियों की हड़ताल सरकार के लिए चुनौती बनती जा रही है। किसान कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि पटवारी संघ के साथ तत्काल संवाद कर तकनीकी और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि खरीदी के दौरान किसानों को राजस्व संबंधी कामों के लिए परेशान न होना पड़े। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार धान खरीदी की तैयारियों के साथ राजस्व व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए क्या कदम उठाती है।
