प्रसव के दूसरे दिन बिगड़ी हालत, ऑपरेशन में निकली 6 किलो की विशाल ओवेरियन सिस्ट
30×30 सेंटीमीटर की गांठ ने बढ़ाई थी जटिलता, शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्त्रीरोग विशेषज्ञों ने सफल सर्जरी कर बचाई महिला की जान
महासमुंद। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सह जिला अस्पताल के स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों ने गंभीर प्रसवोत्तर जटिलता से जूझ रही एक महिला की सफल सर्जरी कर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। सामान्य प्रसव के महज दूसरे दिन महिला के पेट में अचानक अत्यधिक सूजन, तेज दर्द और गंभीर एनीमिया की स्थिति सामने आने के बाद चिकित्सकों ने तत्काल जांच और उपचार शुरू किया। जांच के दौरान पेट में बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ जमा होने का पता चला। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी कर तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों को पेट के भीतर लगभग 30×30 सेंटीमीटर आकार की और करीब 6 किलोग्राम वजन की विशाल ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय की गांठ) मिली। इतनी बड़ी गांठ के कारण मामला बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण था। चिकित्सकों की टीम ने अत्यंत सावधानी और कुशलता के साथ सर्जरी करते हुए गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति चिकित्सकीय निगरानी में रखी गई।
प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
अस्पताल में महिला का सामान्य प्रसव हुआ था। प्रसव के अगले ही दिन उसके पेट में असामान्य रूप से सूजन बढ़ने लगी और तेज दर्द के साथ खून की अत्यधिक कमी यानी गंभीर एनीमिया की स्थिति सामने आई। चिकित्सकों ने तत्काल अल्ट्रासोनोग्राफी कराई, जिसमें पेट के भीतर अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ (सीवियर एसाइटिस) जमा होने की जानकारी सामने आई। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए आगे की जांच और उपचार में देरी करना जोखिम भरा हो सकता था। ऐसे में विशेषज्ञों ने तत्काल एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी का निर्णय लिया।
ऑपरेशन में सामने आया चौंकाने वाला कारण
सर्जरी के दौरान पेट के भीतर विशाल आकार की ओवेरियन सिस्ट मौजूद होने का पता चला। करीब 6 किलो वजनी और 30×30 सेंटीमीटर आकार की इस गांठ को सावधानीपूर्वक निकाला गया। चिकित्सकों के अनुसार, प्रसव के बाद महिला की अचानक बिगड़ी स्थिति के बीच इतनी बड़ी ओवेरियन सिस्ट का सामने आना इस मामले को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाता है।
प्रसवोत्तर असामान्य लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि प्रसव के बाद पेट में असामान्य सूजन, लगातार या तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी अथवा अन्य असहज लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रसवोत्तर अवधि में किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। समय पर की गई जांच और उचित उपचार कई बार गंभीर स्थिति में जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
इनकी रही अहम भूमिका
इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली टीम में स्त्रीरोग एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. नेहा ठाकुर, डॉ. प्रतिमा कोशेवारा और डॉ. गरिमा सोलंकी, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अमितेश एवं डॉ. अजय तथा नर्सिंग एवं सहायक स्टाफ से सिस्टर पूजा, सिस्टर तृप्ति सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। टीम की तत्परता, सूझबूझ और समन्वित प्रयास से महिला को गंभीर स्थिति से बाहर निकालने में सफलता मिली।
