सेवा की कहानी : एक आजीविका से तीन व्यवसायों तकः सिंधु सिंह ने लिखी नई इबारत

आर्थिक आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी
बैकुण्ठपुर,12 अक्टूबर 2026/छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और बिहान अंतर्गत बने स्व सहायता समूह के सहयोग से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। इसी कड़ी में कोरिया जिले के ग्राम छिंदिया की श्रीमती सिंधु सिंह ने एक आजीविका पर निर्भर रहने वाली सामान्य ग्रामीण महिला से तीन आजीविका गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन करने वाली आत्मनिर्भर उद्यमी तक का प्रेरणादायक सफर तय किया है। अपने परिवार के साथ निरंतर मेहनत, बेहतर प्रबंधन और तीनों आजीविका गतिविधियों के सफल संचालन से एक घरेलू महिला के जीवन में सब कुछ बदल गया है।
पूर्व की स्थिति
सिंधु सिंह पहले एक सामान्य आर्थिक स्थिति वाले ग्रामीण परिवार से थीं। परिवार की आजीविका का मुख्य आधार केवल एक छोटी सी किराना दुकान थी। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आय का एकमात्र स्रोत होने से परिवार की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा था। सिंधु के मन में हमेशा यह इच्छा रहती थी कि वे कुछ अतिरिक्त कार्य करके परिवार की आमदनी बढ़ाएं और आर्थिक रूप से मजबूत बनें।
बिहान बना माध्यम
सिंधु सिंह के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत कुहू महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद हुई। उन्होंने समूह से नब्बे हजार रूपए का ऋण लेकर अपनी आजीविका गतिविधियों का विस्तार दिया। समूह से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग कर सिंधु ने अपनी पूर्व से संचालित किराना दुकान के साथ बकरी पालन एवं सिलाई कार्य प्रारंभ किया। बकरी पालन से उन्हें अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिला, वहीं सिलाई कार्य के माध्यम से उन्होंने अपने कौशल को स्वरोजगार में बदल दिया। इस प्रकार एक ही आजीविका पर निर्भर रहने वाला परिवार अब तीन अलग-अलग आर्थिक गतिविधियों से आय अर्जित करने लगा।
मेहनत और सोच से बनी राह
सिंधु सिंह ने बताया कि आज उनकी वार्षिक आय लगभग दो से तीन लाख तक पहुंच गई है। आय के विभिन्न स्रोत विकसित होने से परिवार की आर्थिक सुरक्षा बढ़ी है तथा घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हुई है। पहले जहां सिंधु सिंह सीमित आय और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन कर रही थीं, वहीं आज वे अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी हैं। स्वयं की आय अर्जित करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार एवं समाज में उनकी पहचान एक मेहनती, आत्मनिर्भर एवं सफल महिला उद्यमी के रूप में स्थापित हुई है।

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