’दो गायों से शुरू हुआ सफर, डेयरी ने संतराम के परिवार में लाई खुशहाली’

कोरबा 18 सितम्बर 2026/उम्र के 67वें पड़ाव पर जब परिवार की जिम्मेदारियां कम होने के बजाय बढ़ रही थीं, तब पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम सिरमिना (जूनापारा) निवासी संतराम श्याम के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी-परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आय का स्थायी जरिया खड़ा करना। खेती और मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी से आठ सदस्यों वाले परिवार का गुजारा करना आसान नहीं था। कई बार जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें कर्ज का सहारा लेना पड़ता था।
संतराम की इच्छा थी कि वे खेती के साथ ऐसा व्यवसाय शुरू करें, जिससे परिवार को नियमित आमदनी मिल सके। उन्हें लगा कि पशुपालन उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन डेयरी शुरू करने के लिए जरूरी पूंजी उनके पास नहीं थी।
इसी बीच डेयरी उद्यमिता विकास योजना ने उनके इस सपने को सहारा दिया। पशुधन विकास विभाग से योजना की जानकारी मिलने के बाद संतराम ने आवेदन किया। वर्ष 2023-24 में उन्हें दो उन्नत नस्ल की दुधारू गायों की खरीदी के लिए 1.40 लाख रुपये की सहायता 100 प्रतिशत अनुदान के रूप में मिली।
संतराम ने इस सहायता का उपयोग करते हुए 1.20 लाख रुपये में दो उन्नत नस्ल की गायें खरीदीं। यही दो गायें उनके लिए आर्थिक बदलाव की शुरुआत बनीं। दूध उत्पादन शुरू होने के साथ डेयरी व्यवसाय ने गति पकड़ी और पशुपालन उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया।
आज संतराम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.80 लाख रुपये हो गई है। पहले जहां परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए आर्थिक परेशानियों और कर्ज का सामना करना पड़ता था, वहीं अब नियमित आमदनी ने परिवार को आर्थिक मजबूती दी है। डेयरी से होने वाली आय ने उन्हें अपनी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने का भरोसा दिया है और कर्ज की निर्भरता से राहत मिली है।
संतराम के लिए यह बदलाव केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जिसमें सही समय पर मिली सरकारी सहायता ने एक किसान को अपनी मेहनत और पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया।
वे कहते हैं, डेयरी उद्यमिता विकास योजना के लिए पशुधन विकास विभाग द्वारा दी गई सहायता के लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। यह योजना स्वरोजगार चाहने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है।
संतराम श्याम की कहानी बताती है कि छोटी शुरुआत भी बड़े बदलाव की नींव बन सकती है। दो उन्नत नस्ल की गायों से शुरू हुआ उनका डेयरी का सफर आज परिवार की आर्थिक मजबूती और खुशहाली का आधार बन चुका है।

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