265 पद, 608 अभ्यर्थी… फिर 1:3 का हिसाब कहां गया?

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सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा के परिणाम पर कांग्रेस ने उठाए सवाल; उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी का आरोप, पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार स्थगित करने की मांग
महासमुंद। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 के मुख्य परीक्षा परिणाम के बाद आयोग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 265 पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में मुख्य परीक्षा के बाद 608 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए चयनित किया गया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि साक्षात्कार के लिए पदों की तीन गुना संख्या का प्रावधान है, तो 265 पदों के मुकाबले 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार का अवसर मिलना चाहिए था। पार्टी ने 187 अभ्यर्थियों को कम किए जाने पर आयोग से नियम और चयन प्रक्रिया का स्पष्ट आधार सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव, पूर्व विधायक विनोद चंद्राकर, शहर अध्यक्ष गुरमीत चावला, दाऊलाल चंद्राकर, अंकित बागबहरा, गणेश शर्मा, समीम खान, संजय शर्मा, नितिन बैनर्जी और लक्ष्मी देवांगन ने संयुक्त पत्रकार वार्ता में सीजीपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आयोग का तर्क है कि 187 अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल नहीं कर सके। पार्टी ने पूछा कि इन अभ्यर्थियों के अंक कितने थे और न्यूनतम अर्हकारी अंक का निर्धारण किस आधार पर हुआ, इसका प्रमाण आयोग सार्वजनिक करे।
एक जैसा सही जवाब, अंक अलग-अलग… मूल्यांकन पर उठे सवाल
कांग्रेस ने राज्य सेवा परीक्षा-2024 की कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार, कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं में एक ही प्रश्न के समान और सही उत्तर लिखे जाने के बावजूद एक अभ्यर्थी को शून्य तो दूसरे को पूर्ण अंक दिए गए। इसी तरह महाभिनिष्क्रमण से जुड़े प्रश्न के समान उत्तरों में भी अलग-अलग अंक दिए जाने का दावा किया गया।
कांग्रेस ने होमरूल लीग से संबंधित प्रश्न का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक अभ्यर्थी ने सही उत्तर लिखा, जबकि दूसरे का उत्तर गलत था, फिर भी दोनों को समान अंक दिए गए। पार्टी ने इन उदाहरणों को मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करने वाला बताते हुए सभी उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है।
साक्षात्कार से पहले कॉपियां देने की मांग
कांग्रेस ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के साक्षात्कार शुरू होने से पहले अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अभ्यर्थियों को यह देखने का अधिकार होना चाहिए कि उनकी कॉपियों का मूल्यांकन किस प्रकार किया गया। चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ साक्षात्कार से बाहर हुए अभ्यर्थियों को भी उत्तर-पुस्तिकाएं निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
पार्टी ने मूल्यांकनकर्ताओं के लिए स्पष्ट एवं पारदर्शी मानदंड तय करने, मुख्य परीक्षा के मॉडल उत्तर सार्वजनिक करने तथा मूल्यांकन प्रक्रिया को जांच के दायरे में लाने की मांग भी की।
2024 में भी अनुपात से कम अभ्यर्थी लेने का दावा
कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य सेवा परीक्षा-2024 में भी मुख्य परीक्षा के बाद निर्धारित अनुपात की तुलना में 95 अभ्यर्थी कम साक्षात्कार के लिए लिए गए थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि लगातार दो परीक्षाओं में चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना प्रदेश के युवाओं के भरोसे से जुड़ा गंभीर विषय है।
कांग्रेस ने सरकार और आयोग से मांग की है कि जब तक उठाए गए सवालों का स्पष्ट निराकरण नहीं होता, तब तक साक्षात्कार प्रक्रिया स्थगित की जाए और पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
घोषणा-पत्र के वादे की भी दिलाई याद
कांग्रेस ने इस मुद्दे को भाजपा के 2023 विधानसभा चुनाव के घोषणा-पत्र से भी जोड़ते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने सीजीपीएससी की परीक्षाओं को यूपीएससी की तर्ज पर पारदर्शी तरीके से आयोजित करने तथा तत्कालीन कथित पीएससी घोटाले की जांच कराने का वादा किया था। कांग्रेस के अनुसार, मार्च 2024 में राज्य सरकार ने भी सीजीपीएससी की परीक्षाओं को यूपीएससी की तर्ज पर अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने की घोषणा की थी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब दो लगातार परीक्षाओं में मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना सरकार और आयोग के लिए गंभीर विषय है। पार्टी ने उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन, मॉडल उत्तर जारी करने, अभ्यर्थियों को कॉपियां उपलब्ध कराने और साक्षात्कार में 1:3 के अनुपात को सुनिश्चित करने की मांग की है।

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