ऊसर जमीन पर खिला हरियाली का संसार, रामसागरपारा स्कूल बना मिसाल

शिक्षक कोमल दीवान के संकल्प से बदली विद्यालय परिसर की तस्वीर, फूल-फल और औषधीय पौधों से महक रही बाल वाटिका
महासमुंद। बारनवापारा अभयारण्य से सटे महासमुंद विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय रामसागरपारा, संकुल पटेवा की कभी ऊसर पड़ी जमीन आज हरियाली से गुलजार है। शिक्षक कोमल दीवान के संकल्प और शाला प्रबंधन समिति, विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय परिसर ने ऐसा रूप ले लिया है कि यहां पढ़ाई के साथ बच्चों को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का भी जीवंत पाठ मिल रहा है। ज्ञान के इस मंदिर में फूलों और फलों की बगिया से वातावरण में हरियाली के साथ प्रेरणा की खुशबू भी फैल रही है। विद्यालय की चहारदीवारी के भीतर लता बाल वाटिका और किचन गार्डन विकसित किए गए हैं। परिसर में औषधीय, फलदार, छायादार, पुष्पीय एवं सजावटी पौधों की विभिन्न प्रजातियां लगाई गई हैं। इससे विद्यालय का वातावरण न केवल आकर्षक बना है, बल्कि बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बन गया है।
रंग-बिरंगे फूलों से सजी है बाल वाटिका
विद्यालय की बाल वाटिका में अनेक पुष्पीय एवं सजावटी पौधे लगाए गए हैं। इनमें क्रिसमस ट्री, बाटल पाम, सैबरस, मधुकामिनी, एक्जोरा, अशोक, विद्या पत्ता, टगर, चांदनी, गुलाब, डहेलिया, रजनीगंधा, शो पत्ती, लिली, गेंदा, मिनी गोल्ड मोहर, पेंडुला, पर्शियन सिल्क ट्री, बोगनविलिया, गुड़हल और कनेर सहित विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं। इन पौधों के फूल विद्यालय परिसर की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं।
संकल्प से मिली सफलता
विद्यालय के शिक्षक कोमल दीवान ने बताया कि जब उन्होंने विद्यालय की ऊसर जमीन को उपजाऊ बनाकर परिसर को हरा-भरा करने का संकल्प लिया, तब शुरुआत में उन्होंने स्वयं पौधे लगाना शुरू किए। धीरे-धीरे रंग-बिरंगे फूलों और पौधों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और इस अभियान से अन्य लोग भी जुड़ते चले गए।
शाला प्रबंधन समिति के मोहन यादव, कमल ध्रुव, उमाशंकर, विनोद, सफाईकर्मी वीरनारायण ध्रुव सहित पूर्व अध्यक्ष शंकर ठाकुर ने भी इस अभियान में सहयोग दिया। विद्यालय की चहारदीवारी बनने के बाद परिसर सुरक्षित हुआ तो हर वर्ष शिक्षक और विद्यार्थियों द्वारा नियमित रूप से पौधारोपण किया जाने लगा।
विद्यालय के इस हरित अभियान में डीएफओ महासमुंद, विकासखंड अधिकारी, नोडल अधिकारी और संकुल समन्वयक सहित अन्य अधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर सहभागिता निभाई।
बाल वाटिका में दुर्लभ औषधीय पौधा हड़जोड़ भी
विद्यालय की बाल वाटिका की खासियत यह भी है कि यहां आयुर्वेद की दृष्टि से उपयोगी और दुर्लभ माने जाने वाला हड़जोड़ औषधीय पौधा भी मौजूद है। इसके अलावा आंवला, नीम, जामुन, तुलसी, चिरायता, बादाम, मीठा नीम, पुदीना, मेहंदी, अजूबा, छुईमुई और हल्दी सहित कई औषधीय एवं उपयोगी पौधे लगाए गए हैं।
वहीं परिसर में छायादार पौधों के रूप में करन, गुलमोहर, केला और मौलश्री सहित अन्य पौधे भी मौजूद हैं। इस तरह विद्यालय परिसर बच्चों के लिए एक तरह की जीवंत वनस्पति पाठशाला बन गया है, जहां वे किताबों के साथ प्रकृति के बीच रहकर पौधों की विविधता और उनके महत्व को भी समझ रहे हैं।
पढ़ाई के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
रामसागरपारा का यह विद्यालय बताता है कि सीमित संसाधनों में भी यदि संकल्प और सामूहिक सहभागिता हो तो ऊसर जमीन को भी हरित परिसर में बदला जा सकता है। विद्यालय की बाल वाटिका और किचन गार्डन बच्चों में प्रकृति के प्रति लगाव पैदा करने के साथ उन्हें पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व का व्यावहारिक ज्ञान भी दे रहे हैं। शिक्षक, विद्यार्थी, शाला प्रबंधन समिति और ग्रामीणों की सहभागिता से विकसित यह परिसर क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बन रहा है।

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