मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत कोंडागांव जिले में व्यापक स्वास्थ्य जांच

घर-घर पहुंची स्वास्थ्य टीम, 6.57 लाख लोगों की स्क्रीनिंग
कोंडागांव, 28 अगस्त 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से शुरू किए गए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान का उद्देश्य बस्तर के लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाना और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ना है। इसी उद्देश्य को लेकर कोंडागांव जिले में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचीं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई तथा जरूरतमंद मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा गया। अभियान के तहत जिले में 6 लाख 57 हजार 801 लोगों की स्क्रीनिंग की गई।
कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। जिले के सभी गांवों के लिए स्वास्थ्य जांच का रोस्टर तैयार किया गया। इसके अनुसार स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग की। वहीं, ऐसे दूरस्थ और पहुंचविहीन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचना कठिन है, वहां मोबाइल मेडिकल यूनिट भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई गई।
अभियान के दौरान कोंडागांव जिले में निवासरत विभिन्न जनसमूहों की स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य टीमों ने सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ विभिन्न गंभीर एवं गैर-संचारी रोगों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया। जांच के दौरान संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उन्हें आवश्यक जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की खासियत यह रही कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को केवल अस्पताल तक आने का इंतजार नहीं करना पड़ा, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की टीम स्वयं उनके घर तक पहुंची। इससे ऐसे मरीजों की पहचान संभव हुई, जो दूरी, आवागमन या अन्य कारणों से नियमित रूप से स्वास्थ्य संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते थे। घर-घर हुई स्क्रीनिंग के दौरान बड़ी संख्या में मधुमेह और उच्च रक्तचाप के नए मामले सामने आए। साथ ही मोतियाबिंद, टीबी, कुष्ठ, कैंसर और मलेरिया जैसे रोगों के संदिग्ध एवं पुष्ट मामलों की भी पहचान हुई।
मोतियाबिंद के 345 संदिग्ध मामले, 56 ऑपरेशन
अभियान के दौरान जिले में मोतियाबिंद की स्क्रीनिंग भी की गई। विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार 345 संदिग्ध मोतियाबिंद मामलों की पहचान हुई। जांच के बाद 125 मामलों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई तथा 56 मरीजों के ऑपरेशन किए गए। कोंडागांव में 105 संदिग्ध मामलों में 42 की पुष्टि और 11 ऑपरेशन हुए। केशकाल में 96 संदिग्ध मामलों में 22 की पुष्टि तथा 12 ऑपरेशन किए गए। माकड़ी में 46 संदिग्ध मामलों में 19 की पुष्टि और 9 ऑपरेशन हुए। फरसगांव में 40 संदिग्ध मामलों में 31 की पुष्टि तथा 23 ऑपरेशन किए गए। विश्रामपुरी में 58 संदिग्ध मामलों में 11 की पुष्टि हुई।
टीबी की जांच में 5 मरीजों की पुष्टि
अभियान के दौरान टीबी की पहचान के लिए भी विशेष स्क्रीनिंग की गई। एनटीईपी रिपोर्ट के अनुसार 13 अप्रैल से 31 मई 2026 के दौरान जिले में 136 कफ संदिग्ध मामलों की पहचान हुई। इन मरीजों की ट्रूनेट, सीबीनाट एवं माइक्रोस्कोपी जैसी जांच प्रक्रियाओं से जांच की गई। जांच के बाद 5 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई और उनका उपचार प्रारंभ किया गया।
कुष्ठ रोग के 55 संदिग्ध मरीज चिन्हांकित
कुष्ठ रोग की पहचान के लिए भी जिले में व्यापक स्क्रीनिंग की गई। अभियान के दौरान 55 संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की पहचान हुई। इनमें बड़ेराजपुर में 20, कोंडागांव में 23, माकड़ी में 6, फरसगांव में 5 और केशकाल में 1 संदिग्ध मरीज शामिल है। चिन्हांकित मरीजों को आवश्यक जांच एवं उपचार की प्रक्रिया से जोड़ा गया।
कैंसर की शुरुआती पहचान में भी मिली सफलता
अभियान के दौरान कैंसर की स्क्रीनिंग पर भी जोर दिया गया। जिले में 5 ओरल कैंसर के मामले चिन्हांकित किए गए, जिनमें एक नया मामला सामुदायिक स्तर पर हुई स्क्रीनिंग के दौरान सामने आया। इसके अलावा स्तन कैंसर के 3 नए मामले, एक अन्य स्तन कैंसर मामला, एक ल्यूकेमिया तथा एक पुराने सर्वाइकल कैंसर के मामले की पहचान की गई। चिन्हांकित मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में जांच एवं उपचार के लिए रेफर किया गया।
1,678 नए मधुमेह और 1,951 उच्च रक्तचाप के मरीज
अभियान के दौरान गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग में भी बड़ी संख्या में मरीज चिन्हांकित हुए। जिले में 1,678 नए मधुमेह तथा 1,951 नए उच्च रक्तचाप के मामले सामने आए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन मरीजों को आवश्यक परामर्श, जांच और उपचार से जोड़ा गया।
मलेरिया के 42 संदिग्ध मामले, 5 की पुष्टि
मलेरिया की स्क्रीनिंग के दौरान 42 संदिग्ध मामले सामने आए। आवश्यक जांच के बाद 5 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई और उनका उपचार किया गया। वहीं फाइलेरिया के 12 संदिग्ध मामलों की उच्च स्तरीय जांच में सभी के परिणाम निगेटिव पाए गए।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान का उद्देश्य केवल लोगों की स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच में सामने आए संदिग्ध एवं पुष्ट मरीजों को आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी रहा। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जरूरत के अनुसार मरीजों को परामर्श दिया, आवश्यक जांच कराई और उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया।
कोंडागांव जिले में अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों तक स्वास्थ्य टीमों की पहुंच और गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान ने यह साबित किया कि समय पर जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाना जनस्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से शुरू इस अभियान के माध्यम से कोंडागांव जिले में स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच बनाते हुए लोगों को स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाओं से जोड़ने का काम किया है। अभियान ने “स्वास्थ्य सुविधा लोगों के द्वार” की सोच को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

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