कच्चा तेल सस्ता, फिर भी महंगा पेट्रोल-डीजल, 15 रुपये प्रति लीटर कटौती की मांग
आलोक चंद्राकर बोले- तेल कंपनियों के मुनाफे की रखवाली कर रही भाजपा सरकार, महंगाई की मार झेल रही जनता
महासमुंद। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत नहीं मिलने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री आलोक चंद्राकर ने केंद्र सरकार पर तेल कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम तत्काल 15 रुपये प्रति लीटर घटाने की मांग की है।
श्री चंद्राकर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटकर लगभग 74.64 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक रुपये की भी कमी नहीं की गई, जिससे आम जनता महंगाई की दोहरी मार झेल रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह तर्क दे रही है कि युद्धकाल के दौरान तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसकी भरपाई के बाद ही उपभोक्ताओं को राहत दी जाएगी। लेकिन जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं तो तेल कंपनियां तत्काल कीमतें बढ़ा देती हैं। ऐसे में उस समय जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ की भरपाई कौन करेगा?
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार तेल कंपनियों के मुनाफे की रक्षा कर रही है, जबकि आम जनता लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और शिपिंग लागत बढ़ने का तर्क अब कमजोर पड़ चुका है, क्योंकि हालात सामान्य हो रहे हैं और परिवहन लागत में भी कमी आने लगी है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने में कोई बाधा नहीं है।
आलोक चंद्राकर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ सबसे पहले आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए, न कि तेल कंपनियों को। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हर संकट को अवसर बनाकर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर कटौती का दावा किया गया था, लेकिन उसका वास्तविक लाभ आम लोगों तक क्यों नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि महंगे डीजल के कारण किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है, वहीं परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
श्री चंद्राकर ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों को देखते हुए पेट्रोल और डीजल के दामों में तत्काल 15 रुपये प्रति लीटर की कमी की जाए। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और अधूरे वादों से परेशान जनता अब सरकार से जवाब मांग रही है तथा सस्ता कच्चा तेल होने के बावजूद महंगा ईंधन बनाए रखना आम लोगों के साथ अन्याय है।
