जल संरक्षण की दिशा में बेमेतरा को मिली बड़ी सफलता
ग्रीष्मकालीन धान का रकबा घटने और जल संरक्षण उपायों से भू-जल स्तर में सुधार
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पेयजल स्थिति बेहतर, नगरीय क्षेत्रों में टैंकर निर्भरता कम
बेमेतरा 20 मई 2026/- बेमेतरा जिले में जल संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन, कृषि विभाग एवं ग्रामीण जनसहभागिता के संयुक्त प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 15 मई 2026 की स्थिति में जिले का औसत भू-जल स्तर 28.17 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि मई 2025 में यह 29.13 मीटर था। इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 0.96 मीटर का सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार जिले में ग्रीष्मकालीन धान के रकबे में कमी, जल संरक्षण को लेकर जागरूकता, भू-जल दोहन पर नियंत्रण एवं वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने जैसी पहलों का सकारात्मक प्रभाव सामने आया है।
ग्रीष्मकालीन धान में कमी से मिला लाभ
पिछले वर्षों में जिले में बड़े पैमाने पर ग्रीष्मकालीन धान की खेती की जा रही थी, जिसके कारण भू-जल स्तर तेजी से प्रभावित हुआ था। धान की फसल में अत्यधिक पानी की आवश्यकता होने के कारण कई क्षेत्रों में हैंडपंप और ट्यूबवेल सूखने लगे थे तथा पेयजल संकट की स्थिति निर्मित हो गई थी। इसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा किसानों से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें अपनाने की अपील की गई। प्रशासन की अपील एवं लगातार जनजागरूकता अभियान के बाद किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान का रकबा काफी कम किया है। इसके परिणामस्वरूप जिले में इस वर्ष भू-जल स्तर की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
भू-जल संरक्षण के लिए लगातार किए गए प्रयास
जिले में जल संरक्षण को लेकर कई स्तरों पर कार्य किए गए। प्रशासन द्वारा भू-जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों के संरक्षण एवं पानी के सीमित उपयोग को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया गया। साथ ही जिले में अनियंत्रित बोर खनन पर भी प्रतिबंध लगाया गया है, जिससे भू-जल के अत्यधिक दोहन पर नियंत्रण स्थापित हुआ है। प्रशासन द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक जनभागीदारी का विषय है।
इस वर्ष पेयजल स्थिति पहले से बेहतर
पिछले वर्ष जिले के कई क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। नगरीय निकाय क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी तथा कई ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में जिले में ऐसी गंभीर परिस्थिति निर्मित नहीं हुई है। इस वर्ष अधिकांश क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था सामान्य बनी हुई है तथा जलापूर्ति सुचारु रूप से संचालित हो रही है। प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण संबंधी प्रयासों एवं ग्रीष्मकालीन धान में कमी का इसका प्रत्यक्ष लाभ देखने को मिल रहा है।
वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ रहे किसान
जिले में अब किसानों को दलहन, तिलहन, मक्का, चना, गेहूं, सूरजमुखी एवं अन्य कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने किसानों एवं आम नागरिकों से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा है कि आने वाले समय में टिकाऊ कृषि व्यवस्था एवं सुरक्षित पेयजल व्यवस्था के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।
