शासकीय व्यय में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन पर राज्य शासन सख्त संसाधनों के संयमित उपयोग हेतु व्यापक निर्देश जारी

30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगे विशेष दिशा-निर्देश, सभी विभागों को कड़ाई से पालन के आदेश
एमसीबी/18 मई 2026/राज्य शासन ने वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन, सार्वजनिक व्यय में नियंत्रण तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक जिम्मेदार, डिजिटल और संसाधन-संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शासकीय व्यय में मितव्ययिता एवं वित्तीय अनुशासन संबंधी महत्वपूर्ण निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य सरकारी खर्चों में अनावश्यक व्यय पर नियंत्रण, ऊर्जा संरक्षण, ईंधन बचत और डिजिटल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देना है।
राज्य शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 30 सितंबर 2026 तक सभी विभागों, निगमों, मंडलों, आयोगों एवं शासकीय संस्थाओं को इन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।
कारकेड में वाहनों का सीमित उपयोग
माननीय मुख्यमंत्री, मंत्रीगण तथा निगम, मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारियों के कारकेड में केवल अत्यावश्यक वाहनों का उपयोग किया जाएगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल आवश्यकता आधारित हो तथा अनावश्यक वाहन उपयोग पर रोक लगाई जाए।
शासकीय वाहनों को चरणबद्ध रूप से इलेक्ट्रिक बनाने की पहल
पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए राज्य के समस्त शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे दीर्घकालिक व्यय में कमी के साथ हरित प्रशासनिक व्यवस्था को भी बल मिलेगा।
पेट्रोल-डीजल खर्च कम करने हेतु वाहन पूलिंग
सरकारी वाहनों में पेट्रोल और डीजल के व्यय को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं। एक ही गंतव्य की ओर जाने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे ईंधन और परिवहन व्यय में कमी लाई जा सके।
विदेश यात्राओं पर सख्त नियंत्रण
अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यदि विशेष परिस्थितियों में विदेश यात्रा आवश्यक हो तो मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन अनिवार्य होगा।
वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता
भौतिक बैठकों के स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं ऑनलाइन समीक्षा बैठकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमित समीक्षा बैठकंो अनिवार्य रूप से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएं तथा भौतिक बैठकें यथासंभव माह में एक बार तक सीमित रहें।
ऊर्जा संरक्षण पर विशेष जोर
कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद सभी शासकीय कार्यालयों में लाइट, पंखे, एसी, कंप्यूटर एवं अन्य विद्युत उपकरणों को अनिवार्य रूप से बंद किया जाएगा। ऊर्जा की बर्बादी रोकने हेतु सभी कार्यालयों को प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।
ई-ऑफिस और डिजिटल फाइलिंग को बढ़ावा
प्रिंटेड पेपर, बुकलेट्स और फिजिकल फाइलों के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों ( PDF] PPt आदि) के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यालयीन पत्राचार एवं नस्तियों का संचालन अनिवार्य रूप से ई-ऑफिस प्रणाली से किया जाएगा, जिससे कागज, स्टेशनरी एवं प्रिंटिंग खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।
IGOt कर्मयोगी पोर्टल आधारित प्रशिक्षण
भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बजाय IGOt कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। सभी विभागों को अपने विशिष्ट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रशिक्षण व्यय कम हो और अधिकाधिक अधिकारी-कर्मचारी डिजिटल माध्यम से दक्ष हो सकें।
जिम्मेदार शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राज्य शासन के ये निर्देश केवल खर्च में कटौती तक सीमित नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रशासनिक कार्यसंस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिसमें वित्तीय अनुशासन, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, डिजिटल सशक्तिकरण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक साथ सुनिश्चित हो। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और सभी विभागों को अपने कार्यों में मितव्ययिता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही को प्राथमिकता देनी होगी। यह पहल सुशासन, जिम्मेदार प्रशासन और संसाधन संरक्षण की दिशा में राज्य शासन की दूरदर्शी नीति को दर्शाती है।

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