डबरी ने बदली बिसाहिन की तकदीर: वर्षा आधारित खेती से बनीं सफल उद्यमी
कृषि तालाब योजना से मिली नई दिशा, आय के खुले नए रास्ते
महासमुंद। जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पहरनादादर की निवासी बिसाहिन की जिंदगी में कृषि तालाब (डबरी) निर्माण योजना ने बड़ा बदलाव ला दिया है। कभी केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहने वाली बिसाहिन का परिवार सीमित संसाधनों और अनिश्चित आय के कारण आर्थिक संघर्ष से जूझता था। बारिश पर निर्भर खेती से गुजारा मुश्किल हो रहा था, लेकिन वर्ष 2025 में शुरू हुई इस योजना ने उनकी किस्मत बदल दी।
2.49 लाख की लागत से बना जल संचयन का मॉडल
शासन द्वारा तालाब निर्माण के लिए 2 लाख 74 हजार 999 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से 2 लाख 49 हजार 613 रुपये की लागत से एक सुंदर सीढ़ीनुमा कृषि डबरी का निर्माण किया गया। लगभग 20×20 मीटर आकार की यह डबरी करीब 894 घन मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता रखती है। यह अब गांव में जल संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है और सूखे के समय में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।
मछली पालन से बढ़ी आय, खेती बनी बहुआयामी
बिसाहिन बताती हैं कि डबरी बनने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन शुरू किया। पहले जहां वे केवल एक फसल पर निर्भर थीं, अब मछली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसके साथ ही अब वे रबी फसल और सब्जियों की खेती भी आसानी से कर पा रही हैं, क्योंकि उनके पास निजी जल स्रोत उपलब्ध है। इस तरह डबरी ने उन्हें दोहरी आय का साधन प्रदान किया है।
समूह से जुड़कर मिली आर्थिक मजबूती
बिसाहिन ‘जय सतनाम महिला स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हुई हैं, जिसका संचालन लोकोस ऐप के माध्यम से किया जाता है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें कम ब्याज पर ऋण मिला, जिससे उन्होंने मछली बीज और चारा खरीदा।
समूह के माध्यम से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिले। चारा निर्माण और जाल बुनने जैसी गतिविधियों से अन्य महिलाएं भी जुड़ रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
बिसाहिन की सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की अन्य महिलाएं भी तालाब के किनारे बाड़ी निर्माण और सब्जी उत्पादन जैसे छोटे-छोटे उद्यम शुरू करने की योजना बना रही हैं।
आज बिसाहिन एक साधारण किसान से आगे बढ़कर सफल उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं। उनका आत्मविश्वास और मेहनत गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
“यह तालाब मेरे भविष्य की उम्मीद है”
बिसाहिन भावुक होकर कहती हैं,
“यह तालाब मेरे लिए केवल एक गड्ढा नहीं, बल्कि मेरे भविष्य की उम्मीद है। अब मुझे पानी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और मछलियों ने मेरी आय दोगुनी कर दी है।”
जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में कुल 501 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है। इन डबरी से आर्थिक रूप से लोगों में बदलाव ला रही है।
