डिजिटल जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं होने पर आप का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
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महासमुंद। आगामी डिजिटल जनगणना के पहले चरण (16 अप्रैल से 30 अप्रैल) एवं दूसरे चरण (1 मई से 30 मई) के दौरान प्रस्तावित भौतिक सत्यापन में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पृथक कॉलम नहीं रखे जाने पर आम आदमी पार्टी (आप) ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं ने सोमवार को बसना में अनुविभागीय अधिकारी की अनुपस्थिति में उनके स्टेनो के माध्यम से महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त, भारत सरकार तथा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र चन्द्राकर, संयुक्त सचिव संजय यादव, जिला उपाध्यक्ष गोपाल वैष्णव, यूथ विंग जिलाध्यक्ष खिरोद पटेल एवं पार्षद इरफान इल्लु सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र चन्द्राकर ने सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडल आयोग (1980) के अनुसार देश में ओबीसी की आबादी 52 प्रतिशत है, जबकि हालिया सर्वेक्षणों में यह आंकड़ा 44 से 48 प्रतिशत के बीच बताया जा रहा है। ऐसे में देश की लगभग आधी आबादी को जनगणना में अलग से शामिल नहीं करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने बताया कि राजपत्र के बिंदु क्रमांक 12 में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए स्पष्ट कॉलम का प्रावधान है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए कोई अलग कॉलम निर्धारित नहीं किया गया है। इससे ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का सही आकलन संभव नहीं हो पाएगा।
चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ओर जातिगत जनगणना की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी वर्ग को गणना में अलग पहचान नहीं देना अन्यायपूर्ण है।
इस मुद्दे पर सर्व छत्तीसगढ़िया समाज एससी-एसटी-ओबीसी महासंघ द्वारा भी प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है, जिससे प्रदेश में बढ़ते आक्रोश का संकेत मिल रहा है।
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए पृथक कॉलम जोड़ा जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इस मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो पार्टी छत्तीसगढ़ में व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।
