माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर ‘युद्ध और शांति’ विषयक काव्य गोष्ठी आयोजित
महासमुंद। स्थानीय आस्था साहित्य समिति के तत्वावधान में राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती के अवसर पर वृंदावन विद्यालय में ‘युद्ध और शांति’ विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक डॉ. संजीव कर्माकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आनंद तिवारी ‘पौराणिक’ ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. कर्माकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीयता के प्रतीक थे और उनकी रचनाएं आज भी युद्ध और शांति के संदर्भ में प्रासंगिक हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में आनंद तिवारी ‘पौराणिक’ ने काव्यपाठ करते हुए शांति और सृजन का संदेश दिया।
काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से युद्ध की विभीषिका और शांति की आवश्यकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। एस. चंद्रसेन ने बदलते सामाजिक मूल्यों पर चिंतन व्यक्त किया, वहीं पत्रकार उत्तरा विदानी ने छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ से श्रोताओं को प्रभावित किया। सुजाता विश्वनाथन ने राष्ट्रकवि की प्रसिद्ध रचनाएं ‘पुष्प की अभिलाषा’ एवं ‘चलो सजाओ सैन्य’ को मधुर स्वर में प्रस्तुत किया।
डॉ. साधना कसार ने अपने काव्य में शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध में जीत-हार दोनों में पीड़ा ही मिलती है। गीतकार सुरेंद्र मानिकपुरी ने शहीदों को समर्पित गीत प्रस्तुत कर भावनात्मक माहौल बना दिया। कार्यक्रम का संचालन टेकराम सेन ‘चमक’ ने अपने साहित्यिक अंदाज में करते हुए श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। उन्होंने भी काव्य पाठ के माध्यम से मां और मातृभूमि के प्रति भावनाएं व्यक्त कीं।
कवि सुरेंद्र अग्निहोत्री ‘आगी’ ने छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ से शांति का संदेश दिया। इसके अलावा डॉ. रामशरण चंद्राकर, चंद्रशेखर सिंह गौर, बंधु राजेश्वर खरे एवं एस.आर. बंजारे ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को समृद्ध किया।
कार्यक्रम में उपप्राचार्य इंदु मिश्रा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। आभार प्रदर्शन एम.आर. विश्वनाथन ने किया। कार्यक्रम की जानकारी साहित्यकार एस.आर. बंजारे ने दी।
