“10 लाख की रंगदारी नहीं दी तो जेल भेजने की धमकी”
पुलिस कर्मी के भाई पर ट्रांसपोर्टरों का संगीन आरोप, उग्र आंदोलन की चेतावनी
महासमुंद। जिले में ट्रांसपोर्टरों के साथ मारपीट, धमकी और कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है। छत्तीसगढ़ हाईवा परिवहन कल्याण संघ ने इस पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संघ द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ग्राम पंचायत नांदगांव में सड़क निर्माण कार्य के दौरान ट्रांसपोर्टरों के वाहन चालक और ऑपरेटर मौके पर कार्यरत थे। इसी दौरान गुलशन जांगड़े नामक व्यक्ति वहां पहुंचा और कथित रूप से गाली-गलौज करते हुए ड्राइवरों को जान से मारने की धमकी देने लगा। आरोप है कि उसने खुद को प्रभावशाली बताते हुए अपने भाई अजय जांगड़े के पुलिस विभाग में पदस्थ होने का हवाला दिया और राजनीतिक पहुंच का भय दिखाया।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल, सचिव प्रदीप चंद्राकर सहित पदाधिकारियों हेमंत चोपड़ा, शैलेंद्र चंद्राकर, ओमकार ठाकुर, हनिफ निजामी और राधेलाल निषाद ने पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार से मुलाकात कर बताया कि गुलशन जांगड़े ने ट्रांसपोर्टरों से 10 लाख रुपए की मांग की। रकम नहीं देने पर झूठे मामलों में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी दी गई।
आरोपों के मुताबिक, कुछ देर बाद सिटी कोतवाली में पदस्थ आरक्षक 304 अजय जांगड़े भी मौके पर पहुंच गया। दोनों भाइयों ने मिलकर कथित रूप से गुंडागर्दी करते हुए गंदी गालियां दीं और हाईवा मालिक पुरन निर्मलकर, कमल साहू और तुषार साहू को थाना ले जाकर लॉकअप में बंद कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें रातभर दबाव में रखा गया और धमकाया जाता रहा।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों आरोपियों ने खुद को राजनीतिक रूप से मजबूत बताते हुए तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष तक को धमकाने की बात कही। उल्लेखनीय है कि आरक्षक अजय जांगड़े की पत्नी नांदगांव जनपद क्षेत्र क्रमांक 7 से जनपद सदस्य हैं, जिससे मामले को लेकर और भी सवाल उठने लगे हैं।
आंदोलन की चेतावनी:
छत्तीसगढ़ हाईवा परिवहन कल्याण संघ ने स्पष्ट कहा है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। संघ ने चेतावनी दी है कि सभी हाईवा वाहनों को खड़ा कर चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
यह मामला सामने आने के बाद जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
