कलेक्टर की सख्ती: ओडिशा से तस्करी में पकड़ा गया अवैध धान और वाहनों को छुड़ाने में तस्करों की छुटने लगा पसीना

अवैध धान और वाहनों का भौतिक सत्यापन करने अफसरों को निर्देश
महासमुंद। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी संपन्न होने के बाद इस दफा ओडिशा से धान की अवैध तस्करी पर जिला प्रशासन की सख्ती का असर साफ नजर आ रहा है। खरीदी समाप्त हुए 20 दिन बीत चुका है, लेकिन धान की तस्करी में पकड़े गए वाहन और जब्त धान अब तक नहीं छूट पाए हैं।
जबकि, पिछले साल तस्करी में पकड़े गए धान और वाहनों को मंडी शुल्क जमा करने के बाद छोड़ दिए गए थे, वहीं इस बार प्रशासन की कड़ाई के चलते तस्करों के पसीने छुटने लगे हैं। अब भौतिक सत्यापन और कलेक्टर के निर्देश के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा रही है, जिससे भविष्य में धान की तस्करी पर अंकुश लगाया जा सके।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान इस बार सर्वाधिक अवैध धान और वाहन ओडिशा के पकड़े गए हैं, जिसके चलते जिला प्रशासन के भी कान खड़े हो गए थे। इस लिए सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई, और अवैध धान परिवहन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई।
कृषि उपज मंडी के सचिव दिनेश कुमार साहू ने बताया कि “पहली बार ऐसा हो रहा है कि धान तस्करों को वाहन छुड़ाने में इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही मंडी शुल्क लेकर वाहन और धान छोड़ा जाएगा। बता दें कि कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में राजस्व, खाद्य, मंडी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा अंतर्राज्यीय सीमाओं पर 16 जांच चौकियां स्थापित कर सतत निगरानी की गई। इसके लिए बकायदा डिप्टी कलेक्टर रैंक के अफसरों को बाॅर्डर पर ड्यूटी लगाई गई थी। इसका परिणाम यह रहा कि अवैध धान परिवहन एवं भंडारण के 399 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1,69,862 क्विंटल धान जब्त किया गया। जबकि पिछले वर्ष केवल 184 प्रकरणों में 12,828.15 क्विंटल धान की जब्ती हुई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में स्थानीय किसानों के दस्तावेज सही पाए गए, उनके धान को प्राथमिकता के साथ छोड़ा गया है। वहीं, अंतर्राज्यीय तस्करी से जुड़े खासकर ओडिशा के मामलों में सख्त रुख अपनाया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाया जा सके। दूसरी ओर मंडी में जब्त धान के रखरखाव को लेकर भी चिंता सता रही है, जहां लंबे समय से पड़े धान को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अवैध धान परिवहन के मामलों में महासमुंद जिला इस बार प्रदेश में अव्वल पर रहा है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया जिले में पारदर्शिता, अनुशासन और संतुलन के साथ संपन्न हुई है। कुल मिलाकर, प्रशासन की सख्ती से जहां तस्करों पर नकेल कसा है, वहीं वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण रहा है।