सामाजिक सहगिता से ही होगा पूर्ण जल संरक्षण : कलेक्टर
कलेक्टर ने अतिथियों व ग्रामीणों को दिलाई जल शपथ
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 16 जनवरी 2026/ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सयुंक्त तत्वावधान में गुरुवार को मोर गांव मोर पानी जल संगवारी अभियान कार्यक्रम सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम पिकरी में किया गया। “जल ही जीवन है” और “जल संरक्षण” संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम किया गया। जल संरक्षण और संवर्धन को जनजागरूकता से जोड़ने के लिए सार्वजनिक मंच प्रांगण में मुख्य अतिथि सत्ताधारी दल के जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल, सुभाष जालान, सरपंच हिरमणि जायसवाल, इंद्रजीत बर्मन जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम वर्षा बंसल और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी की चित्र पर पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिसमें वक्ताओं ने जल संरक्षण के संबंध में विभिन्न जानकारी दी। इसका लक्ष्य जनभागीदारी से सोख्ता गड्ढे बनाकर, नाली में बह रहे पानी को, वर्षा जल को संरक्षित करना और भूजल स्तर बढ़ाना है, ताकि पानी की समस्या का स्थायी समाधान हो सके और इसे जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। इस अभियान में श्रमदान, जागरूकता रैली किया गया, जिससे ग्रामीण और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल रहा है। रैली में महिलाएं व बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और “जल है तो कल है” के नारे के साथ जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश रैली निकालकर ग्रामवासियों दिया। वहीं श्रम दान के तहत कलेक्टर और अतिथि ज्योति पटेल तथा सरपंच ने ग्रामीण के घर में जाकर सोख्ता गड्ढा में ईंट के टुकड़े भरकर श्रमदान किया। अब बेकार बह रहे पानी उस सोख्ता गड्ढा में जायेगा।
कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे द्वारा उपस्थित सभी लोगों को पानी संरक्षण का संकल्प दिलाया कि वे पानी की बर्बादी नहीं करेंगे। वर्षा जल का संचय करेंगे, नदी, तालाब और कुओं को प्रदूषण से बचाएंगे। उन्होंने कहा कि “यह अभियान सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है। शासन प्रशासन अपनी सहभागिता देते हैं लेकिन जब पूरा समाज अपनी सहभागिता देंगे तब पूर्ण जल संरक्षण होगा। ग्राम पंचायत पिकरी की जनता ने आज जो संकल्प लिया है, वह पूरे जिले के लिए मिसाल बनेगा।” उन्होंने बताया कि इसी तरह के कार्यक्रम जिले की अन्य पंचायतों में भी आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अब गांव के लोग घर-घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने और पानी का सदुपयोग करने के लिए प्रेरित हुए हैं। प्रशासन का मानना है कि ऐसे सामुदायिक प्रयासों से न केवल भूजल स्तर में सुधार होगा, बल्कि भविष्य में आने वाले जल संकट से भी निपटा जा सकेगा।
