किसान रकबा त्रुटि सुधार न होने से परेशान, जन चौपाल में लगाई गुहार

कहा-20-25 दिनों से तहसीलदार, पटवारी और समिति का लगा रहे चक्कर
महासमुंद। जिले के कई किसान रकबा त्रुटि सुधार के लिए समितियों व पटवारियों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि वे पूरा धान नहीं बेच पाएंगे तो कर्ज कैसे चुका पाएंगे।
पिथौरा व बागबाहरा तहसील के किसान कलेक्टर जन चौपाल में आज अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। ग्राम गिरना पिथौरा निवासी किसान बलीराम बरिहा ने बताया कि वे अपनी 4.5 एकड़ निजी लगानी भूमि से उत्पादित धान पिछले कई वर्षों से बेचते आ रहे हैं। लेकिन इस बार मेरे भूमि स्वामी रकबा में एक भी एकड़ नहीं दिखा रहा है और न ही धान विक्रय के लिए पंजीयन हो पा रहा है। जिससे वह पिछले 20-25 दिनों से तहसीलदार, पटवारी और समिति का चक्कर लगा रहे हैं, पर समस्या का समाधान नही हो रहा, मैंने बैंक से 1.50 लाख का केसीसी लोन ले रखा है। यदि धान नहीं बिका तो मैं डिफाल्टर हो जाऊँगा। इसी तरह बागबाहरा तहसील के किसान कपिलाश ध्रुव ने बताया कि उनकी 4 हेक्टेयर भूमि है परंतु रकबे में 2 हेक्टेयर दिखा रहा है। प्रेमसिंग के पास 5 हेक्टेयर भूमि मे से 2.50 दिख रहा है। इसी तरह बागबाहरा तहसील के ही दुलेश्वरी के 2.50 हेक्टेयर में से आधा हेक्टेयर, सियाराम के 2 एकड़ में से 1 एकड़, उमरौतिन बाई के 5 एकड़ मे से 2.50 एकड़, माखन बरिहा के 4 हेक्टेयर में से आधा हेक्टेयर, नाथूराम के 5 एकड़ में से 2.5 एकड़ और सुकवारी के 1.75 एकड़ मे से एक रकबा ही आनलाइन दिख रहा है। किसानों ने बताया कि हम सभी ने खेती के लिए हजारों का केसीसी लोन ले रखा है।
किसानों पर लाखों का ऋण
रकबा सुधार के लिए कलेक्टोरेट पहुंचे किसानों में कपिलाश ध्रुव ने 1.13 लाख, प्रेमसिंग का 1.50 लाख, दुलेश्वरी का 36 हजार, सियाराम का 75 हजार रुपए का लोन है। उनका कहना है कि अगर धान नहीं बिका तो लोन कैसे चुकता होगा साथ ही हमें मजबूर होकर व्यापारियों को औने-पौने दाम पर धान बेचना पड़ेगा।