समस्याओं पर चोपड़ा ने उठाई आवाज,श्वेत पत्र जारी करने की मांग
महासमुंद। पूर्व विधायक एवं चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ. विमल चोपड़ा ने क्षेत्र में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण और उससे उत्पन्न जन-समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होने क्षेत्र की जनता, विशेषकर किसानों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। डॉ. चोपड़ा ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण और किसान लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि उद्योगों के प्रदूषण से उनकी फसलें बड़े पैमाने पर खराब हो रही हैं। साथ ही उनकी जमीन और सरकारी जमीनों पर उद्योगों द्वारा अवैध कब्जे की शिकायतों ने क्षेत्र में अशांति का वातावरण निर्मित कर दिया है। डॉ. चोपड़ा ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इन गंभीर विषयों पर एक उच्च-स्तरीय जांच सुनिश्चित की जाए और यह जांच की जाए कि क्या वास्तव में औद्योगिक प्रदूषण से फसलें बर्बाद हो रही हैं? और यदि हां, तो प्रभावित किसानों के लिए उचित मुआवजा किस तरह से तय किया जाए। जिन किसानों की फसलें प्रदूषण से प्रभावित हुई है, उनकी धान खरीदी सोसाइटियों में सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े। क्षेत्र में उद्योगों की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण के मानक और स्थानीय लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर प्रशासन एक विस्तृत ‘श्वेत पत्र’ जारी करें। बिरकोनी और आसपास के क्षेत्रों में संचालित उद्योग जैसे करणी कृपा, अनुपम, और सभी उद्योगों की कार्यप्रणाली की निगरानी हो ताकि स्थानीय लोगों को परेशानी न हो। डॉ. चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि वे उद्योगों के विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा, उद्योग लगने चाहिए। क्योंकि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और क्षेत्र का विकास होता है। लेकिन, विकास की कीमत आम जनता की तकलीफ नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उद्योगों के कारण किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों और स्वास्थ्य का हनन न हो। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि आम जनता के बीच खेती के पानी को लेकर भारी चिंता व्याप्त है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन उद्योगों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें।
