टोकन की समस्या, रकबा सुधार नहीं, लिमिट कम से किसान हो रहे परेशान : पंकज

महासमुंद। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए जो परेशानी वर्तमान शासनकाल में उठानी पड़ रही है, वह छत्तीसगढ़ के इतिहास में कभी नहीं हुआ। आज टोकन की समस्या, रकबा सुधार नहीं होने से धान बेचने से वंचित होने की चिंता, सोसायटियों में धान बेचने बारी का इंतजार करने जैसी समस्याओं से किसानों को जूझना पड़ रहा है। ऊपर से खरीदी लिमिट भी एक बड़ी समस्या है, जो किसानों के धान विक्रय करने में रोड़ा बन रहा है। इसे लेकर पूर्व पार्षद व समाजसेवी पंकज साहू ने सरकार को व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
पूर्व पार्षद साहू ने कहा कि सोसायटियों में 2500 कट्टा तक खरीदी लिमिट रखा गया है। इससे अधिक धान किसी भी सूरत में नहीं लिए जाने के सख्त आदेश हैं। पूर्व सरकार के कार्यकल में प्रतिदिन 4000 कट्टा धान खरीदी लिमिट थी। वहीं, टोकन के लिए सर्वर भी एक बड़ी समस्या बन गई है। टोकन तुंहर एप केवल नाम का रह गया है, बफरिंग होते-होते सुबह से शाम हो जाता है, लेकिन किसानों का टोकन नहीं कट पा रहा। एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पाने से भी जिले के हजारों किसान धान बेचने से वंचित होने को लेकर चिंतित हैं। उपर से टोकन नहीं कटने तथा जिनका टोकन कटा भी उन्हें 10-15 दिन आगे का डेट दिया गया है, ऐसे किसानों को अपनी उपज को सुरक्षित रखने की भी चिंता सता रही है।