किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य, बेच नहीं पाएंगे धान
11 हजार 431 किसानों ने अब तक नहीं कराया है पंजीयन
महासमुंद। किसानों के लिए एक व्यापक डेटाबेस बनाने उन्हें सरकारी योजनाओं का बेहतर वितरण और लक्षित सेवाएं प्रदान करने व डिजिटल समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन दिनों केन्द्र सरकार की ओर से पिछले साल जिन किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा था उनका सहकारी समितियों में एग्रीस्टैक पंजीयन कराया जा रहा है। अभी तक जिले 1 लाख 41 हजार 811 किसानों ने एग्रीस्टैक पंजीयन करा लिया है। यह पंजीयन अनिवार्य रूप से कराना है, अगर किसान पंजीयन नहीं कराते हैं तो वे खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अपना धान नहीं बेच पाएंगे। इसके अलावा उन्हें केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा मिलने वाली कृषि सेवाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
बता दें कि एग्रीस्टैक भारतीय कृषि के लिए भारत सरकार द्वारा विकसित एक डिजिटल इको सिस्टम है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करना है, जिसमें उनकी पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, ऋण और बीमा संबंधी जानकारी शामिल हों। इसका लक्ष्य डेटा और डिजिटल सेवाओं का उपयोग करके विभिन्न हितधारकों को जोड़ना और किसानों को सस्ता ऋण, उच्च गुणवत्ता वाली कृषि सामग्री, बाजारों तक बेहतर पहुंच जैसी सेवाएं प्रदान करना है। पंजीयन से किसानों को आधार जैसी एक डिजिटल पहचान मिलेगी, जिससे विभिन्न सरकारी लाभों तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। मिली जानकारी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में जिले की 182 समितियों के माध्यम से 1 लाख 53 हजार 242 किसानों ने धान बेचा था, जिनका जुलाई से केन्द्र सरकार द्वारा एग्रीस्टैक पंजीयन किया जा रहा है। उक्त किसानों में से 1 लाख 41 हजार 811 किसानों ने पंजीयन कराया है और 11 हजार 431 किसानों ने अब तक पंजीयन नहीं कराया है। ऐसे किसान न केवल धान खरीदी से वंचित हो सकते हैं, बल्कि पीएम किसान योजना की किस्त और फसल बीमा का लाभ भी नहीं ले सकेंगे। केंद्र सरकार किसानों को अलग से चिन्हांकित करने के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन करा रही है। ताकि ऐसे किसानों का पृथक्कीकरण हो जाए जो वास्तविक में खेती करते हैं ताकि कोई भी योजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके। धान बेचने वालों किसानों के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य कर दिया है।
236 नए किसानों का पंजीयन
इधर, समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए हर साल राज्य सरकार द्वारा किसानों का पंजीयन किया जा जाता है। इस साल भी जुलाई माह से किसानों का पंजीयन शुरू हो गया है। जानकारी के अनुसार पिछले साल 1 लाख 62 हजार 288 किसानों ने धान बेचने पंजीयन कराया था। अभी 88 हजार 263 किसानों को केरी फारवर्ड किया गया है वहीं 236 नए किसानों ने पंजीयन कराया है। बता दें कि धान के समर्थन मूल्य बढ़ने व पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली राशि के चलते अब हर साल नए किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
