नवरात्र में भीड़ नियंत्रण करने मंदिर महासंघ ने मांगा अतिरिक्त पुलिस बल
कलेक्टर और एसपी को बताया, भीड़ में बढ़ जाती है जेबकतरे और उठाईगिरी
महासमुंद। शारदीय नवरात्र 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। इस अवसर पर जिले के विभिन्न देवी मंदिरों में भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर महासंघ ने कलेक्टर और एसपी को मांग पत्र सौंपकर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और विशेष प्रबंधन की मांग की है। मंदिर महासंघ संयोजक मंडल के प्रमुख दाऊलाल चंद्राकर, दानवीर शर्मा और डॉ. नीरज गजेंद्र ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के लिए जिले भर से श्रद्धालुजन उमड़ते हैं। इस दौरान मंदिरों तक पहुंचने वाले मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। वहीं भीड़ का लाभ उठाकर जेबकतरे और उठाईगिरों जैसी असामाजिक गतिविधियों के सक्रिय होने की आशंका भी बनी रहती है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग का सहयोग आवश्यक है।
महासंघ ने मांग की है कि जिले के प्रमुख देवी मंदिरों और उनके आसपास के मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की जाए। दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की सक्रिय तैनाती हो। साथ ही महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला पुलिसकर्मियों की भी नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। संयोजक मंडल के सदस्यों ने कहा कि मंदिर महासंघ से जुड़े सभी ट्रस्ट और समितियां अपनी ओर से तैयारियां कर रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कतारबद्ध व्यवस्था, पीने के पानी, सफाई और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा की भी तैयारी की जा रही है। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को संभालने में केवल समितियों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। प्रशासनिक और पुलिस विभाग की सहभागिता से ही नवरात्रि का पर्व सुचारु और सुरक्षित वातावरण में सम्पन्न हो सकेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नवरात्र के दौरान मंदिर परिसरों और उनके मार्गों में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की व्यवस्था को सुदृढ़ करवाया जाए। ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड की सहायता से पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मंदिर महासंघ ने प्रशासन से अपील की है कि समय रहते सुरक्षा और यातायात प्रबंधन की तैयारी की जाए, जिससे नौ दिनों तक श्रद्धालुजन निर्बाध रूप से दर्शन लाभ प्राप्त कर सकें और जिले की धार्मिक परंपरा गरिमा के साथ निर्विघ्न बनी रहे।
