ज्योति” नेत्र परीक्षण शिविर में 3845 बच्चों का किया नि:शुल्क जांच
दंतेवाड़ा, 14 दिसंबर 2024। जिला शिक्षा विभाग व आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया के सहयोग से शनिवार को 122 शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 3845 बच्चों का किया निशुल्क नेत्र परीक्षण किया गया। “बाल ज्योति” नेत्र देखभाल कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के बच्चों के नेत्र स्वास्थ्य की देखभाल करना है। और इस कार्यक्रम को समग्र शिक्षा और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड के सहयोग से चलाया गया है। इस परियोजना का लक्ष्य शुरुआती चरण में ही नेत्र समस्याओं का निवारण कर अंधेपन की बड़ी समस्या से निपटना है। इसके लिए स्कूलों में चलित नेत्र क्लिनिक के माध्यम से नेत्र परीक्षण सेवाएँ प्रदान की गई है। ज्ञात हो कि “बाल विश्व स्तर पर 6-15 आयु वर्ग के बच्चों में दृष्टि दोष का मुख्य कारण अनसुधारित अपवर्तक त्रुटि है। बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार लगभग 5ः बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याएं होती हैं, जिनमें अधिकांश अपवर्तक त्रुटियों के कारण होती हैं, जिन्हें चश्मे से सुधारा जा सकता है। यदि समय पर पहचान और उपचार न किया जाए, तो ये बच्चे पढ़ाई में खराब प्रदर्शन करते हैं और परीक्षा में असफलता के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ भी सकते हैं। इसी क्रम में क्लस्टर स्तर पर निशुल्क नेत्र देखभाल शिविर आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम के अंतर्गत दंतेवाड़ा जिले के चार ब्लॉक दृ दंतेवाड़ा, गीदम, कटेकल्याण और कुआकोंडा के 122 शैक्षणिक संस्थानों के लगभग 3845 बच्चों की जांच की गई।
जिला प्रशासन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के अधिक से अधिक बच्चे इस नेत्र परीक्षण शिविर से लाभान्वित हो सकें। जाँच प्रक्रिया का संचालन जेके आई हॉस्पिटल एवं रेटिना केयर, गीदम रोड, जगदलपुर की स्वास्थ्य टीम द्वारा किया गया। जाँच प्रक्रिया के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा बच्चों की पहचान और पंजीकरण, अंतिम परीक्षण नेत्र रोग विशेषज्ञ, ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा फोकस कैंपों में कंप्यूटराइज्ड एवं मैनुअल परीक्षण,मुफ्त नेत्र सेवाएँ नेत्र रोगियों के लिए मुफ्त ऑप्टिकल और फार्मेसी सेवाएँ, दी गई। तथा चश्मा वितरण “बाल ज्योति नेत्र देखभाल कार्यक्रम” के तहत किया गया। जांच के बाद 945 बच्चों में अपवर्तक त्रुटि पाई गई और 10 बच्चों में मोतियाबिंद की पहचान की गई। अपवर्तक त्रुटि वाले बच्चों को चश्मा बाद में निशुल्क वितरित किया जाएगा। इस शिविर की सफलता में जिला प्रशासन एवं समग्र शिक्षा दंतेवाड़ा, ने अपने दायित्व के तहत विशेष रूप से सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
