मानव अधिकार दिवस पर हुआ विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन

महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर प्लान आफ एक्शन के तहत आज सरायपाली में मानव अधिकर दिवस जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
प्रधान न्यायाधीश प्रफुल्ल सोनवानी द्वारा न्यायालय परिसर सरायपाली में आयोजित शिविर में संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकरों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रधान न्यायाधीष ने बताया कि प्रत्येक मनुष्य सुरक्षित स्थान पर रहने और जीविकोपार्जन के अधिकार का हकदार है। अतः सभी को संविधान द्वारा प्रदाय की गई अधिकारों में समान अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के उल्लंघन की क्रूरताओं का सामना कर रहे लोगों से प्राप्त समस्याओं और शिकायतों को देखकर और उन्हें खत्म करने का प्रयास करके दुनिया में सद्भाव और शांति लाना। उन्होंने बताया कि यह दिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1948 में 10 दिसंबर को की गई घोषणा की याद में दुनिया भर में मनाया जाता है। मानवाधिकार दिवस मूल रूप से मनुष्य के अधिकारों का समर्थन करने, जश्न मनाने और प्रेरित करने में भूमिका निभाता है। यह एक वैश्विक कार्यक्रम है जिसे हर कोई मनाता है और अपने अधिकारों का आनंद उठाता है। प्रधान न्यायाधीश ने आगे कहा कि मानवाधिकार दिवस लोगों और हमारी नई और आने वाली पीढ़ी को उन अधिकारों के बारे में जागरूक करता है जो एक इंसान के पास हैं।
इसके अलावा सिविल न्यायाधीष श्रीमती नमिता मिंज भास्कर तथा अविनाश टोप्पो द्वारा शिविर आयोजित कर मानव अधिकार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यों एवं उनके द्वारा दी जाने वाली विधिक सहायता अथवा सलाह के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिष्चित किया गया है और गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए निः शुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था की गई है। संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) के तहत राज्य का यह उत्तदायित्व है कि वह सबके लिए समान अवसर सुनिष्चित करें, समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को सक्षम विधिक सेवाए प्रदान करने के लिए एक तंत्र की स्थापना करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पास किया गया। इसी के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) का गठन किया गया है, जो कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करने और उसका मूल्यांकन एवं उनके सतत निगरानी का कार्य कर लोगों को कानूनी सहायता एवं सलाह उपलब्ध कराती है। इसी प्रकार प्रत्येक राज्य में एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जिसके अंतर्गत उस राज्य के पूरे सभी जिलों में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तहसील क्षेत्रों में तालुका विधिक सेवा समिति का गठन किया गया है। इसका कार्य नालसा की नीतियों और निर्देशों को कार्य रूप देना और लोगों को निःशुल्क कानूनी सेवाए प्रदान कराना होता है। आज मानव अधिकर दिवस पर तालुका स्थित न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा आरक्षी केन्द्र में पदस्थ पैरालिगल वाॅलेटिंयरों द्वारा भी ग्राम पंचायतों में जाकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। उक्त जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दामोदर प्रसाद चन्द्रा ने दी है।

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