जैविक बस्तर की दिशा में रोड मैप पर हुई परिचर्चा
ऑर्गेनिक दंतेवाड़ा कॉन्कलेव-2024
दंतेवाड़ा, 06 दिसंबर 2024। आज जावंगा ऑडिटोरियम में आयोजित ’’ऑर्गेनिक दंतेवाड़ा कॉन्कलेव’’ 2024 के दौरान देश के विभिन्न प्रदेशों से आए जैविक कृषि विशेषज्ञों एवं विपणन फर्म प्रतिनिधियों जैसे टाटा समूह के बिग बास्केट, सुपर मार्केट, नाबार्ड, इत्यादि तथा जिले के कृषि अधिकारियों के मध्य बस्तर क्षेत्र में जैविक कृषि उत्पादों के खरीद बिक्री, मांग आधारित बाजार, वनीय बागानी, और अन्य कृषि उत्पादों के भण्डारण, प्रसंस्करण, व विपणन के साथ-साथ कृषिगत मशीनरी के उपयोग कृषि वस्तुओं के आवागमन के संबंध में परिचर्चा का आयोजन भी हुआ। परिचर्चा में कृषि विपणन के महत्व को दर्शाते हुए बताया गया कि कृषि विपणन के अन्तर्गत वे सभी सेवाएँ आ जाती हैं जो कृषि उपज को खेत से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचाने में करनी पड़ती हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। देश की राष्ट्रीय आय, रोजगार, जीवन-निर्वाह, पूंजी-निर्माण, विदेशी व्यापार, उद्योगों आदि में कृषि की सशक्त भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। यही कारण है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के सराहनीय योगदान होने के साथ-साथ विश्व में भी कृषि क्षेत्र में साख बनी हुई है।
इसे देखते हुए बस्तर क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों को देखते हुए, जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यह न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर सकती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और उपभोक्ताओं के लिए स्वस्थ खाद्य उत्पादों को सुनिश्चित करने में भी मदद करती है। ऑर्गेनिक दंतेवाड़ा कॉन्क्लेव के द्वितीय चरण में भारत सरकार के द्वारा संचालित वृहद क्षेत्र प्रमाणीकरण कार्यक्रम अंतर्गत जैविक खेती की संभावनाओं पर विचार-विमर्श। किसानों की चुनौतियों को समझने और उनका समाधान निकालने। जैविक उत्पादों के बाजार तक पहुँच के उपायों पर फोकस किया गया था। इसके साथ ही जैविक खेती के महत्व, पर्यावरण, के लिए लाभप्रद (जैसे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना, जल संरक्षण)। रासायनिक खेती की तुलना में जैविक खेती के स्वास्थ्य लाभ। स्थानीय उत्पादों (जैसे रागी, कोदो, हल्दी, महुआ) का जैविक उत्पादन पर भी विचार विमर्श किया गया।
परिचर्चा में जैविक कृषि की प्रमुख चुनौतियों, जैसे ज्ञान की कमी (जैविक विधियाँ अपनाने में दिक्कत), बाजार की उपलब्धता, लागत और उत्पादकता की समस्याएँ, समाधान किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अभाव तथा इसके उचित समाधान, सहकारी समितियां बनाकर सामूहिक विपणन, बाजार की रणनीति, ब्रांडिंग और पैकेजिंग, स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच। ई-कॉमर्स और जैविक उत्पादों के लिए विशेष प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जैविक खेती की तकनीकों पर कार्यशालाओं के आयोजन, स्थानीय किसानों के अनुभव साझा करने,पायलट प्रोजेक्ट गाँव-स्तर पर जैविक खेती के मॉडल फार्म विकसित करने, जागरूकता अभियान, जैविक उत्पादों के स्वास्थ्य लाभ, उपभोक्ताओं और किसानों के बीच संवाद, बस्तर के जैविक किसानों को प्रमाणित करने, स्थानीय जैविक ब्रांड स्थापित करने, वैश्विक बाजार, में बस्तर के जैविक उत्पादों को पहुँचाने जैसे मुददों पर भी आगन्तुक अतिथियों ने अपने विचारों को रखा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ षासन आयुक्त एव सचिव षहला निगार ने भविष्य में भी इस प्रकार के जैविक कृषि के संबंध में आयोजन करने और दन्तेवाड़ा जिले के अलावा अन्य जिलों में भी जैविक कृषि को बढ़ावा देने और रणनीतियों के अमल करने पर जोर दिया। इस मौके पर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, कृषि उप संचालक सूरज पंसारी सहित अन्य जिलों के कृषि अधिकारी उपस्थित थे।
