बस्तर ओलंपिक, युवाओं के हुनर को मंच देने वाली अनूठी पहल, बेटियां दिखा रहीं अपना दम

कोण्डागांव, 14 नवंबर 2024। बस्तर के युवाओं के लिए बस्तर ओलंपिक एक नई सुबह का आगाज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच और प्रेरणा से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के माध्यम से क्षेत्र के युवाओं को विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका मिला है। यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि बस्तर क्षेत्र के युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से सुदूरवर्ती क्षेत्रों के युवाओं को एक ऐसा मंच प्रदान किया जा रहा है, जहां वे अपनी काबिलियत और मेहनत को पूरे जिले के सामने ला सकते हैं।
सभी विकासखंडो में खिलाड़ी अपने-अपने खेल में बेहतर प्रदर्शन कर न केवल अपने परिवार का बल्कि अपने गांव का नाम भी रोशन कर रहे हैं। बस्तर ओलंपिक में भाग लेने वाले जिले के सुदूर अंचलों के युवाओं ने बताया कि उन्हें पहली बार इस तरह के आयोजन में आकर अपने खेल में भाग लेने का अवसर मिला है, जिसने उनके आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है। जिला प्रशासन द्वारा युवाओं के इस आत्मविश्वास को बरकरार रखते हुए संपूर्ण आयोजन के दौरान खिलाड़ियों के लिए ठहरने, भोजन और पेयजल जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही आयोजन स्थल पर स्वास्थ्य कर्मियों की टीम सहित एम्बुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत इलाज मुहैया कराया जा सके। बस्तर ओलंपिक को और अधिक खास बनाने के लिए सभी आयोजन स्थलों में सेल्फी जोन बनाया गया हैं, जिसमें प्रतिभागी और दर्शक सभी इस पल को सहेज सकें। जिला प्रशासन द्वारा सेल्फी लेने वाले खिलाड़ियों को फोटो प्रिंट कराकर उपलब्ध भी कराया जा रहा है।
बस्तर ओलंपिक ने बस्तर की ग्रामीण प्रतिभाओं को एक पहचान दिलाई है। प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं युवतियों में से कई का सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना है। विकासखंड स्तरीय बस्तर ओलंपिक प्रतियोगिता में शामिल होने पहुंची सियाबती नेताम ने बताया कि वे वर्तमान में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं, ग्राम चिचडोंगरी की रहने वाली हैं। वह अभी पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल, में रहकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। सियाबती का सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना है, और इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं। उनके बड़े भाई सेना में कार्यरत हैं, जिससे प्रेरित होकर वे भी सेना में शामिल होना चाहती हैं। किसान परिवार से आने वाली सियाबती को दौड़, खो-खो, वॉलीबॉल और कबड्डी जैसे खेल बेहद पसंद हैं। सियाबती, बस्तर ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं की शुरुआत के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहती हैं, ‘सरकार ने हम जैसे युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं। मुझे विश्वास है कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से मेरे करियर को दिशा मिलेगी और मैं अपने सपनों को साकार कर पाऊंगी।’
इसी तरह, अनामिका नेताम भी बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं और उनका भी सपना सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना है। उनके पिता, जो कि एक शिक्षक हैं, उनके इस निर्णय में उनका पूरा समर्थन करते हैं। अनामिका का कहना है कि खेलों में उनकी भागीदारी और सरकार की इस पहल ने उन्हें एक नई दिशा प्रदान की है। दीपिका नेताम एक सामान्य परिवार से आती हैं, और उनका सपना आर्मी में शामिल होने का है। दीपिका का परिवार खेती-बाड़ी करता है। उनका कहना है कि बस्तर ओलम्पिक में भाग लेने से उनका मनोबल बढ़ा है, क्योंकि वे अंदरुनी क्षेत्रों से आकर जिला मुख्यालय में खो खो खिलाड़ी के रूप में खेल प्रतियोगिता का हिस्सा बन रही हैं।
होलिका नेताम एक सामान्य परिवार से हैं, और उनका परिवार कृषि कार्य करता है। घर के कामों में सहयोग देने वाली होलिका का सपना है कि वह आर्मी में भर्ती होकर देश की सेवा करे। होलिका कहती हैं कि आज भी कई लड़कियां घर तक ही सीमित रह जाती हैं, लेकिन वह अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं और समाज में कुछ अलग करने का इरादा रखती हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने आर्मी में जाने का निर्णय लिया है और इसके लिए तैयारी भी कर रही हैं। बस्तर ओलंपिक से उनकी तैयारी को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वह खुद को और निखार सकेंगी।
आशमती करंगा, जो कि ग्राम चिमड़ी की निवासी हैं, ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है। उनकी मां का देहांत बचपन में ही हो गया था और उनके पिता कई वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। इस कारण उन्हें बड़ी बहन के साथ छोटी उम्र से ही अपने परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। आशमती की इच्छा भी सेना में जाकर देश की सेवा करने की है, लेकिन उनकी बड़ी बहन, पूरे घर की देखभाल के लिए अकेली होने के कारण उनके साथ घर की जिम्मेदारी निभाने में सहयोग कर रही हैं। आशमती का कहना है कि उनकी बहन ही उनके परिवार के लिए एक मां की तरह हैं। इसके बावजूद आशमती खेलों में रुचि रखती हैं और बस्तर ओलंपिक में दौड़, खो-खो और कबड्डी में भाग लेकर अपने सपने को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।
ग्राम चौडंग के रहने वाले एक गरीब किसान परिवार से हेमलाल पोटाइ खेल के प्रति समर्पित युवा हैं। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने केवल बारहवीं तक की पढ़ाई की, लेकिन खेलों के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। उन्हें क्रिकेट और खो-खो खेलना बहुत पसंद है, और कई बार उन्हें इस जुनून के लिए परिवार से डांट भी सुननी पड़ती है। हेमलाल का कहना है कि बस्तर ओलंपिक ने उनके जैसे ग्रामीण युवाओं के लिए बड़े स्तर पर खेलने का सुनहरा मौका दिया है। वे 2022 में जिला स्तर पर खो-खो खेल चुके हैं और उनके अच्छे प्रदर्शन के कारण उनका चयन संभाग स्तर पर हुआ था।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग में माओवाद की घटनाओं में लगातार कमी आई है। इससे क्षेत्र के लोग भयमुक्त होकर अपने जीवन को संवारने और आगे बढ़ने के अवसर पा रहे हैं। पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं आज बस्तर के अंतिम छोर तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे आमजन का विश्वास बढ़ा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि युवाओं को सही दिशा और मंच प्रदान करने से उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी सोच के साथ शासन द्वारा बस्तर ओलंपिक की शुरूआत की गई है। बस्तर ओलंपिक जैसी पहल केवल खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत भी है। इसके माध्यम से सुदूरवर्ती क्षेत्रों के युवा न केवल अपने हुनर को प्रदर्शित कर रहे हैं बल्कि यह भी महसूस कर रहे हैं कि वे समाज की मुख्यधारा का हिस्सा हैं। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जो कि सुदूर अंचल के ग्रामीण युवाओं के सपनों को पंख दे रही है।