जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में दूसरा नेत्रदान, परिजनों ने पेश की मानवता की मिसाल

23 वर्षीय स्वर्गीय यश गुप्ता के नेत्रदान से जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी की उम्मीद, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी की प्रक्रिया
मोहला, 23 अक्टूबर 2026/जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में नेत्रदान के प्रति जागरूकता और मानव सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। जिले में दूसरा नेत्रदान किया गया। ग्राम विजयपुर निवासी स्वर्गीय यश गुप्ता, पिता स्वर्गीय अरविन्द गुप्ता, उम्र 23 वर्ष के निधन के बाद उनके परिजनों ने दुःख की इस घड़ी में भी मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। परिजनों की इस पहल से जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद जगी है। उनका यह निर्णय समाज को नेत्रदान के महत्व और मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का प्रेरणादायक संदेश देता है।
नेत्रदान की प्रक्रिया 22 अक्टूबर 2026 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोटाटोला एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला से संबंधित स्वास्थ्य अमले के सहयोग से संपन्न कराई गई। जिला राजनांदगांव के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्ने, जिला सहायक नोडल अधिकारी सुनील कुमार वर्मा एवं सुदेश कुमार रामटेके तथा जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय खोबरागड़े और जिला अंधत्व नोडल अधिकारी डॉ. आर.आर. धुर्वे के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश ठाकुर की निगरानी में मेडिकल कॉलेज, पेंड्री, राजनांदगांव की नेत्रदान टीम ने प्रक्रिया पूरी की। टीम में डॉ. शिवानी, डॉ. जयंत, डॉ. पवन एवं नेत्र सहायक अधिकारी संजीव कुमार यादव शामिल रहे।
नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोटाटोला के नेत्र सहायक अधिकारी आकाश साहू तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौड़ीकसा के नेत्र सहायक अधिकारी छबल नेताम ने विशेष सहयोग दिया। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहला के मेडिकल ऑफिसर डॉ. आनंद बेडकर, एमएलटी विनोद साहू, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी तथा ग्रामीण चिकित्सा सहायक विष्णु गुप्ता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
स्वर्गीय यश गुप्ता के परिजनों द्वारा लिया गया यह निर्णय इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसकी संवेदनशीलता और दूसरों के जीवन में उजाला लाने का संकल्प जीवित रह सकता है। नेत्रदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दृष्टि का उपहार मिलने की संभावना बनती है। जिले में संपन्न हुआ यह दूसरा नेत्रदान समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ ही अन्य लोगों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाला सराहनीय कदम है।

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