जिले में स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
कलेक्टर रणबीर शर्मा ने कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश
गरियाबंद 12 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम, 2002 के तहत जिले में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने, निवेशकों को उद्योग स्थापना के दौरान आने वाली कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण करने तथा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से आज जिला निवेश प्रोत्साहन समिति की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में हुई इस बैठक में जिले में औद्योगिक विकास की संभावनाओं, लंबित प्रकरणों और स्थानीय उत्पादों को व्यावसायिक पहचान दिलाने के उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक दीनबंधु धु्रव, उप संचालक कृषि चंदन रॉय सहित समिति के सदस्य और जिले के औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
महुआ, चिरौंजी और बांस जैसे स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा –
बैठक में जिले के विशिष्ट उत्पादों महुआ, चिरौंजी, बांस सहित अन्य स्थानीय उत्पादों के निर्यात संवर्धन और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं पर विशेष चर्चा की गई। कलेक्टर श्री शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को इन उत्पादों के संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों पर आधारित प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके। इससे जिले में नए उद्योगों की स्थापना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
लंबित प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा –
समिति की बैठक में सिंगल विंडो सिस्टम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों और जिला स्तर पर लंबित औद्योगिक अनुमतियों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही औद्योगिक भूमि के लिए संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदनों, शासकीय भूमि हस्तांतरण, संबंधित विभागों से अभिमत प्राप्त करने तथा औद्योगिक विकास के लिए निजी भूमि अर्जन से जुड़े प्रकरणों पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर श्री शर्मा ने संबंधित विभागों को लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने और निवेशकों को उद्योग स्थापना के दौरान होने वाली कठिनाइयों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में औद्योगिक विकास के लिए भूमि बैंक तैयार करने के उद्देश्य से भूमि चिन्हांकन की समीक्षा की गई। साथ ही लैंड बैंक एवं औद्योगिक पार्क की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त रखने और औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध भूमि से संबंधित लंबित मामलों पर भी चर्चा की गई। साथ ही औद्योगिक भूमि की उपलब्धता और आवश्यक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया, ताकि जिले में निवेश के इच्छुक उद्यमियों को उद्योग स्थापना में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
नए निवेश, स्टार्टअप और औद्योगिक योजनाओं की समीक्षा –
बैठक में जिले में प्रस्तावित नवीन निवेश, स्टार्टअप गतिविधियों तथा निवेश के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू), निवेश आमंत्रण और अभिस्वीकृति पत्र प्राप्त करने वाली इकाइयों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। संबंधित अधिकारियों को इन इकाइयों की कठिनाइयों की पहचान कर जिला स्तर पर समाधान की दिशा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने लंबित प्रकरणों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिल सके और जिले में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा मिले। बैठक में औद्योगिक नीति एवं नियमों में सुधार के लिए सुझावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। समिति ने जिले में निवेश के अनुकूल वातावरण विकसित करने, स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के साथ कार्य करने पर चर्चा की।
