नन्हें बच्चों को पोषण का सहारा, माता-पिता को मिली राहत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी
पोषण पुनर्वास केंद्रों के विस्तार से दूरस्थ अंचलों तक पहुंची सुविधा
बिलासपुर, 1 अक्टूबर 2026/बच्चा कुपोषण से जूझ रहा हो तो माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता उसके स्वस्थ होने की होती है। लेकिन उपचार के लिए घर से दूर जाकर करीब पंद्रह दिन ठहरना पड़े तो परिवार की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। बिलासपुर जिले में पोषण पुनर्वास केंद्रों के विस्तार ने ऐसे परिवारों को राहत दी है। तखतपुर, बिल्हा और रतनपुर में केंद्रों की सुविधा मिलने से अब अधिक बच्चों तक पोषण संबंधी देखभाल और उपचार पहुंच रहा है।
अप्रैल 2024 से पहले जिले में केवल जिला चिकित्सालय में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित था। दूरस्थ गांवों के माता-पिता को अपने कुपोषित बच्चे के साथ जिला मुख्यालय आना पड़ता था। केंद्र में लगभग 15 दिन रहने की आवश्यकता के कारण कई परिवारों के लिए इस सुविधा का लाभ लेना कठिन था। बच्चे की देखभाल के साथ घर की जिम्मेदारियां संभालना भी उनके लिए चुनौती थी। इन परिवारों की जरूरत को देखते हुए जिले में पोषण पुनर्वास की सुविधाएं बढ़ाने की पहल की गई। कलेक्टर द्वारा जिला खनिज संस्थान न्यास से अनुमोदित राशि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की पहल और संबंधित अधिकारियों के सहयोग से नए केंद्रों का संचालन शुरू हुआ। बिस्तरों की संख्या भी बढ़ाई गई, ताकि अधिक जरूरतमंद बच्चों को भर्ती कर देखभाल और उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इस पहल का असर लाभान्वित बच्चों की संख्या में दिखाई दे रहा है। पहले जिला चिकित्सालय के एकमात्र केंद्र से लगभग 170 से 180 बच्चों को लाभ मिल पाता था। अब नए केंद्रों और बढ़े बिस्तरों के माध्यम से लगभग 800 से 900 बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। अपने क्षेत्र के नजदीक सुविधा मिलने से माता-पिता के लिए बच्चे के साथ रहकर उसका उपचार कराना आसान हुआ है।
इन केंद्रों के नियमित संचालन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की कार्ययोजना में कर्मचारियों और मानदेय सहित आवश्यक व्यय की राशि भी स्वीकृत हुई है। इसके लिए भारत सरकार से राशि प्राप्त हो रही है। स्थानीय जरूरत से शुरू हुई यह पहल अब अधिक बच्चों तक पोषण और उपचार पहुंचाने का माध्यम बनी है। साथ ही उन परिवारों को राहत मिली है, जिनके लिए दूरी कभी बच्चे के उपचार में बाधा थी।