श्रम का सम्मान, बुढ़ापे का संबल
मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन योजना से संवर रहा शत्रुघन साहू का जीवन
रायपुर, 15सितंबर 2026/जीवन का अधिकांश हिस्सा दूसरों के आशियाने बनाने और हाड़-तोड़ मेहनत में गुजारने वाले धमतरी जिले के राजमिस्त्री शत्रुघन साहू के लिए उम्र का यह पड़ाव अब चिंता का विषय नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का प्रतीक बन गया है। तहसील बेलरगांव के ग्राम पंचायत घठुला निवासी श्री साहू पिता स्वर्गीय बिदे राम साहू वर्ष 2011 से श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिक हैं। समय के साथ ढलती उम्र ने जब उनके हाथों की ताकत कम कर दी और नियमित मजदूरी करना कठिन हो गया, तब उनके सामने आजीविका का स्वाभाविक संकट खड़ा होने लगा था। ठीक इसी समय, छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक पेंशन सहायता योजना उनके जीवन में एक मजबूत सहारे के रूप में सामने आई।
अपने श्रमिक कार्ड के नवीनीकरण के लिए जब वे श्रम विभाग के कार्यालय पहुंचे, तो वहां संचालित सेवा संकल्प अभियान ने उनके लिए नई राह खोल दी। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें मार्गदर्शन देते हुए बताया कि 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके और कम से कम 10 वर्षों से मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सरकार प्रतिमाह 1,500 रुपये की पेंशन प्रदान करती है। सही समय पर मिली इस जानकारी के बाद श्री साहू ने आवेदन किया और प्रक्रिया पूरी होते ही उनके खाते में पेंशन की राशि आनी शुरू हो गई।
अब तक श्री साहू को इस योजना के तहत 16 किस्तें सफलतापूर्वक प्राप्त हो चुकी हैं। यह मासिक पेंशन उनके लिए केवल एक सरकारी सहायता नहीं है, बल्कि उनके जीवनभर के कठोर श्रम का सम्मान और बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा का आधार है। आज वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं।
इस योजना की दूरदर्शिता केवल यहीं तक सीमित नहीं है; इसमें यह भी प्रावधान है कि पेंशनधारी की दुखद मृत्यु होने पर उनके पात्र जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पेंशन दी जाएगी। यह नियम श्रमिक परिवारों को भविष्य के प्रति पूरी तरह आश्वस्त करता है। सेवा संकल्प अभियान का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि कोई भी पात्र हितग्राही जानकारी के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे। श्री साहू की यह कहानी शासन की इस मंशा और अभियान की सार्थकता का सबसे जीवंत प्रमाण है।
अपने इस सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन के लिए शत्रुघन साहू आज प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन और श्रम विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि मेहनत करने वाले श्रमिक के बुढ़ापे में सरकार का साथ मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। हर माह मिलने वाली यह पेंशन मेरा सबसे बड़ा सहारा है।
यह सफलता की कहानी इस बात का प्रतीक है कि शासन की संवेदनशीलता जब सही समय पर पात्र व्यक्ति तक पहुंचती है, तो वह कैसे एक पूरे परिवार को सम्मान और सुकून का जीवन दे सकती है।
