चिरायु योजना से बाल मधुमेह से जूझ रही 11 वर्षीय बच्ची को मिला निःशुल्क उपचार

परिवार को इलाज में होने वाले खर्च से मिली आर्थिक राहत
रायपुर, 19 अगस्त 2026/राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की चिरायु योजना ऐसे बच्चों के लिए आशा की किरण बन रही है, जो जन्मजात बीमारियों या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार और पूरी तरह निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से यह योजना बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच एवं उपचार उपलब्ध होने से न केवल बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर उपचार का बोझ भी कम हो रहा है। मुंगेली विकासखण्ड के ग्राम नारायणपुर निवासी 11 वर्षीय किनामिका साहू के लिए भी चिरायु योजना ऐसी ही उम्मीद की किरण बनी है। किनामिका बाल मधुमेह से पीडि़त है और उसका उपचार पूर्व में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उपचार एवं आवश्यक दवाइयों पर परिवार को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह खर्च लगातार चुनौती बन रहा था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा ने बताया कि जांच के दौरान चिरायु टीम को बच्ची के स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिली। इसके पश्चात टीम ने बच्ची को जिला चिकित्सालय में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मधु ध्रुव से स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर बच्ची के उपचार को आगे बढ़ाया गया। चिरायु योजना के अंतर्गत बच्ची को जिला चिकित्सालय के माध्यम से निःशुल्क ग्लूकोमीटर एवं आवश्यक इंसुलिन दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इससे बच्ची के नियमित उपचार में सुविधा मिली और परिवार पर पड़ रहा आर्थिक बोझ भी काफी कम हुआ। समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलने से परिवार को उपचार को लेकर राहत और भरोसा मिला है।
डीपीएम गिरीश कुर्रे ने बताया कि बाल मधुमेह में शरीर में इंसुलिन की कमी के कारण नियमित चिकित्सकीय देखरेख और उपचार आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में समय पर पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। चिरायु योजना के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। किनामिका के परिजनों ने शासन की चिरायु योजना और स्वास्थ्य विभाग की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजी अस्पताल में उपचार पर होने वाला खर्च उनके लिए काफी कठिन था। योजना के माध्यम से निःशुल्क उपचार सामग्री मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। साथ ही परिवार को आर्थिक चिंता से राहत प्रदान कर बच्ची के नियमित उपचार को सुगम बनाया है।