व्हीलचेयर से अपने कदमों पर खड़ी हुई ‘प्रगति’ की प्रेरणादायी कहानी
बेमेतरा 21 जुलाई 2026/- कहते हैं कि जब जीवन में चारों ओर निराशा का अंधेरा छा जाए और परिस्थितियाँ असहनीय लगने लगें, तब समाज और प्रशासन की संवेदनशील पहल किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है। बेमेतरा जिले की 13 वर्ष 10 माह की बालिका प्रगति ताम्रकार (काल्पनिक नाम) की कहानी इसी मानवीय संवेदना, त्वरित हस्तक्षेप और समर्पित प्रयासों का प्रेरणादायी उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब प्रगति चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थी और व्हीलचेयर उसका एकमात्र सहारा थी, लेकिन आज वह अपने पैरों पर आत्मविश्वास के साथ चल रही है।
बचपन में ही आईं कठिनाइयाँ, व्हीलचेयर बना जीवन का सहारा
प्रगति का बचपन संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में ही उसकी माँ का निधन हो गया और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उसे अपने पिता से दूर मामा के घर रहना पड़ा। इसी दौरान गंभीर पेल्विक (Pelvic) समस्या के कारण उसकी चलने-फिरने की क्षमता लगभग समाप्त हो गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसे हर जगह आने-जाने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता था। शारीरिक पीड़ा और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच उसका भविष्य निराशाजनक दिखाई देने लगा था।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की संवेदनशील पहल बनी उम्मीद की किरण
बालिका की स्थिति की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तक पहुँचते ही तत्काल कार्रवाई की गई। 18 मई 2026 को परियोजना समन्वयक राजेंद्र चंद्रवंशी के निर्देश पर चाइल्ड हेल्पलाइन की सुपरवाइजर सुश्री इंद्राणी सिंह ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रगति को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला बेमेतरा के समक्ष प्रस्तुत किया। बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार बालिका की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए उसे सखी वन स्टॉप सेंटर में 15 दिनों के लिए आश्रय दिया गया। इसी दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया ने औचक निरीक्षण के दौरान बालिका की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सकों से समन्वय स्थापित किया और बेहतर उपचार के लिए उसे रायपुर रेफर कराने की पहल की।
रिफरल से पूर्व चाइल्ड हेल्पलाइन की सुपरवाइजर इंद्राणी सिंह, प्रियंका टैंगवार, केस वर्कर स्तुति राजवाड़े तथा सखी वन स्टॉप सेंटर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अभिभावक की भूमिका निभाते हुए जिला अस्पताल बेमेतरा में उसकी आवश्यक चिकित्सीय जांचें कराईं और हर संभव देखभाल सुनिश्चित की।
रायपुर में विशेषज्ञ उपचार और लगातार फॉलोअप से मिली नई जिंदगी
जिला अस्पताल में कुछ विशेष जांचों की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण जिला कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया के सक्रिय प्रयास, समन्वय और लगातार फॉलोअप से प्रगति को डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर रेफर किया गया। पूरे उपचार के दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर इंद्राणी सिंह तथा जिला बाल संरक्षण इकाई की आउटरीच वर्कर अनीता सोनवानी लगातार बालिका के साथ रहीं। मेकाहारा के अस्थि रोग विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण के बाद विस्तृत जांच हेतु उसे डीकेएस अस्पताल, रायपुर भेजा गया, जहाँ उसकी एमआरआई (MRI) सहित आवश्यक चिकित्सकीय जांचें कराई गईं। उपचार एवं जांच के उपरांत 3 जून 2026 को प्रगति को बाल जीवन ज्योति संस्था (बालिका गृह), रायपुर में पुनर्वासित किया गया।
समर्पित देखभाल और मजबूत इच्छाशक्ति ने बदली जिंदगी
बाल जीवन ज्योति संस्था में प्रगति को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और सकारात्मक वातावरण मिला। चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार नियमित दवाइयाँ, विशेष देखभाल और निरंतर निगरानी सुनिश्चित की गई। संस्था की टीम की समर्पित सेवा, डॉक्टरों के प्रभावी उपचार तथा स्वयं प्रगति की अदम्य इच्छाशक्ति ने धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम देना शुरू किया। जिस बालिका के लिए कभी व्हीलचेयर के बिना एक कदम चलना भी असंभव था, वही प्रगति आज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर आत्मविश्वास के साथ चल रही है। उसने अपने नाम के अनुरूप जीवन में आगे बढ़ने का नया रास्ता चुन लिया है।
सामूहिक प्रयासों की मिसाल
प्रगति की यह सफलता जिला कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रबेश सिंह सिसोदिया के सक्रिय नेतृत्व, समन्वय और सतत फॉलोअप के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, सखी वन स्टॉप सेंटर तथा बाल जीवन ज्योति संस्था, रायपुर के सामूहिक, समर्पित और संवेदनशील प्रयासों का जीवंत उदाहरण है। यह कहानी बताती है कि समय पर मिला सहयोग, उचित उपचार और मानवीय संवेदना किसी भी जीवन को नई दिशा दे सकती है।
प्रेरणा संदेश
’’समस्याएँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि सही समय पर संवेदनशील सहयोग, उचित उपचार और विश्वास का साथ मिल जाए, तो व्हीलचेयर पर थमा हुआ जीवन भी अपने कदमों पर फिर से मुस्कुराने लगता है।’’
