दूरस्थ गांव के किसान ने अपनाई आधुनिक खेती, शिवलाल करेंगे नैनो डीएपी का उपयोग
जिला मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम सिंगरौली के किसान ने
रायपुर, 21 जुलाई 2026/बदलते समय के साथ किसान अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपना रहे हैं। खरीफ सीजन 2026 में मनेन्द्रगढ़ के ग्राम सिंगरौली के निवासी किसान शिवलाल ने पहली बार अपनी खेती में नैनो डीएपी उर्वरक का उपयोग करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
शिवलाल ने बताया कि अब तक वे खेती में पारंपरिक डीएपी और अन्य उर्वरकों का उपयोग करते रहे हैं, लेकिन इस वर्ष उन्होंने प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति तथा कृषि विभाग के माध्यम से नैनो डीएपी के बारे में जानकारी प्राप्त की। साथ ही, आसपास के किसानों से भी उन्हें इसके सकारात्मक परिणामों के बारे में पता चला। इन्हीं अनुभवों से प्रेरित होकर उन्होंने इस बार अपनी धान की फसल में नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उनके आसपास के कई किसानों ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग किया था। उन किसानों को फसल की बेहतर बढ़वार और संतोषजनक उत्पादन मिला। बेहतर परिणाम देखने के बाद उन्होंने भी आधुनिक उर्वरक अपनाने का फैसला किया।
शिवलाल के अनुसार, नैनो डीएपी की सबसे बड़ी विशेषता इसका आसान उपयोग है। पारंपरिक खाद की भारी बोरियों की तुलना में इसकी छोटी बोतलों को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है। इससे परिवहन में सुविधा होती है और किसानों का समय व श्रम दोनों बचते हैं। कम मात्रा में उपयोग होने के कारण इसका प्रबंधन भी सरल है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नैनो डीएपी पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में सहायक होता है। इसके संतुलित उपयोग से फसल की बढ़वार बेहतर होती है, उर्वरकों की बर्बादी कम होती है और खेती की लागत में भी कमी आती है। खरीफ सीजन में किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से इनकी उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
शिवलाल ने विश्वास जताया कि इस वर्ष नैनो डीएपी के उपयोग से उनकी धान की फसल बेहतर होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। उन्होंने अन्य किसानों से भी नई कृषि तकनीकों की जानकारी लेकर वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने तथा आधुनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की अपील की।
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में किसानों का नैनो उर्वरकों की ओर बढ़ता रुझान यह दर्शाता है कि अब किसान आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ग्राम सिंगरौली जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में भी किसानों द्वारा नई तकनीकों को अपनाना जिले में कृषि के बदलते स्वरूप का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
