आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े आत्मसमर्पित युवा
कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा का 15 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण संपन्न
सुकमा, 18 जूलाई 2026/ जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 22 जून से 14 जुलाई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण में 25 आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा कृषि आधारित स्वरोजगार के विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य उन्हें आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था।
प्रशिक्षण के दौरान विषय-विशेषज्ञों ने बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, हांडी दवा, थ्री-जी दवा, मछली टॉनिक, नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट, धान में हरी खाद, ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई, फलदार वृक्षारोपण, नीलहरित काई उत्पादन, कृषि यंत्रों का उपयोग, बकरी एवं मुर्गी पालन, ऑयस्टर मशरूम उत्पादन, सब्जी नर्सरी, धान की कतार बुवाई तथा मत्स्य पालन जैसी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षणार्थियों को दंतेवाड़ा जिले के अध्ययन भ्रमण पर भी ले जाया गया, जहां उन्होंने मैलावाड़ा में धान की एसआरआई पद्धति तथा भूमगादी में प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर व्यवहारिक अनुभव प्राप्त किया।
समापन अवसर पर उप संचालक कृषि पी.आर. बघेल, सहायक संचालक सुधीर कुजूर तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एच.एस. तोमर सहित वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को कृषि एवं कृषि आधारित उद्यमों को अपनाकर सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खेती और उससे जुड़े व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं तथा इनके माध्यम से आत्मसमर्पित युवा न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं, बल्कि समाज की मुख्यधारा में आत्मविश्वास के साथ नई पहचान भी बना सकते हैं। प्रशिक्षणार्थियों ने भी अर्जित ज्ञान को स्वरोजगार में अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का संकल्प व्यक्त किया।
