स्व-सहायता समूह से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: बीसी सखी सुशीला सिंह बनीं ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की मिसाल

महिला सशक्तिकरण योजनाओं ने बदली जिंदगी, डिजिटल सेवा केंद्र से हर माह 15 से 18 हजार रुपये की आय
रायपुर, 22 जून 2026/छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, बल्कि स्वरोजगार और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। सूरजपुर जिले के ग्राम छतरंग की श्रीमती सुशीला सिंह इसकी प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है।
कभी कृषि मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली श्रीमती सुशीला सिंह की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परिवार की अधिकांश जिम्मेदारियां उनके कंधों पर थीं, जिससे जीवन-यापन चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसी दौरान उन्हें स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने शिवा स्व-सहायता समूह की सदस्यता लेकर अपनी नई यात्रा की शुरुआत की।
समूह से जुड़ने के छह माह बाद उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) के तहत ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य शुरू किया और ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने लगीं। इससे उनकी आय बढ़ने लगी और आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ।
आय में वृद्धि होने पर श्रीमती सुशीला ने लैपटॉप खरीदकर फोटोकॉपी एवं डिजिटल सेवा केंद्र शुरू किया। बाद में कम्प्यूटर, पासबुक प्रिंटर और अन्य आवश्यक उपकरणों की मदद से उन्होंने ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ किया। इससे उनका व्यवसाय लगातार विस्तार पाता गया और आय के नए स्रोत विकसित हुए।
व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लिया। वर्तमान में उनके उद्यम की कुल लागत लगभग 1.50 लाख रुपये है, जबकि अब तक उन्हें लगभग 2.70 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हो चुका है। उनकी वार्षिक आय करीब 1.40 लाख रुपये है और वर्तमान में वे प्रतिमाह 15 से 18 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उनके परिवार के जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। आज वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं तथा परिवार की आवश्यकताओं को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं। वे ऋण का नियमित भुगतान भी कर रही हैं।
श्रीमती सुशीला सिंह का कहना है कि शासन की आजीविका एवं महिला सशक्तिकरण योजनाओं ने उन्हें गरीबी से बाहर निकलने और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है।